स्व. पंडित राजकुमार त्रिपाठी करीब डेढ़ दशक तक रहे इफको के निदेशक
संवाद न्यूज एजेंसी
मुहम्मदाबाद। सहकारिता रत्न से विभूषित, कुशल शिक्षक, वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी स्व. पंडित राजकुमार त्रिपाठी उत्तर प्रदेश सहकारिता आंदोलन के प्रमुख नेता थे। उनकी प्रतिमा का अनावरण बुधवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा करेंगे।
स्व. राजकुमार त्रिपाठी का जन्म एक फरवरी 1945 को जिले के मुहम्मदाबाद नगर के तिवारीटोला मुहल्ले में हुआ था। उनका निधन सात दिसंबर 2019 को हुआ। उन्होंने अर्थशास्त्र, हिंदी एवं समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर के बाद बीएड की डिग्री प्राप्त की। पत्रकारिता में अपना कैरियर वर्ष 1969 में एक हिंदी दैनिक में ग्रामीण विकास के संबंध में योगदान से प्रारंभ किया। वर्ष 1971 में शिक्षा क्षेत्र में प्रवक्ता के रूप में प्रवेश किया। पत्रकार एवं शिक्षाविद की दोहरी भूमिका में उन्होंने सहकारिता को ग्रामीण समस्याओं के समाधान के रूप में पहचाना तथा स्वयं को सहकारिता के आदर्शों के प्रति समर्पित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को पत्रकारिता के माध्यम से उजागर करने की क्षमता ने उन्हें सहकारिता के क्षेत्र में अलग पहचान दी। सहकारिता के क्षेत्र में प्रगति-पथ पर चलते हुए उन्होंने कई सहकारी समितियों और संस्थाओं का सृजन किया।
वर्ष 1975 के बाद प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसायटी बालापुर के अध्यक्ष बने। ठेकेदार मजदूर एवं रिक्शा ठेला चालक को-ऑपरेटिव सोसाइटी बनाकर उन्होंने दैनिक मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया। किसानों के उत्पाद को उचित मूल्य दिलाने के लिए उन्होंने साग-सब्जी एवं फल संरक्षण सहकारी क्रय-विक्रय समिति यूसुफपुर, फल संरक्षण क्रय-विक्रय सहकारी समिति मोहनपुरा बनाया। इसके अतिरिक्त तिलहन, दलहन सहकारी क्रय-विक्रय समिति मिरानपुर का गठन किया। वर्ष 1988 में उन्होंने गाजीपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का गठन नगरीय क्षेत्र के निर्धनों के उत्थान एवं विकास के लिए किया।
वर्ष 1993 में पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं पश्चिमी बिहार की समस्याओं के लिए ही एक दैनिक समाचार पत्र का प्रकाशन एवं संपादन प्रारंभ किया। राजकुमार त्रिपाठी पैक्स बालापुर, यूसुफपुर सहकारी संघ, यूसफपुर सहकारी क्रय-विक्रय समिति, पूर्वांचल एग्रो मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग मल्टी स्टेट को-आपरेटिव सोसाइटी, डीसीएफ गाजीपुर एवं अर्बन को-आपरेटिव बैंक गाजीपुर के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा जिला सहकारी बैंक गाजीपुर, भूमि विकास बैक उ.प्र. के निदेशक रहे। वर्ष 2004 में वह सहकारी संस्था इफको के निदेशक बने और लगातार मृत्यु पर्यंत निदेशक रहते हुए इस प्रतिष्ठित सहकारी संस्था को नई ऊंचाइयां प्रदान करने में अपना योगदान किया। वह राष्ट्रीय स्तर पर इफको, कृभको, एनसीयूआई, सीडब्ल्यूसी, नैफकब से जुड़े रहे।