मौत होने के बाद वहां से भागकर जौनपुर चला गया। पूछताछ में ये भी सामने आया कि दोनों 18 महीने से एक-दूसरे के संपर्क में थे। सात महीने पहले भी गर्भपात की दवा दी थी। उसे लगा कि पहले की तरह इस बार भी सब ठीक हो जाएगा, लेकिन मामला बिगड़ गया।
आईएमएस बीएचयू स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ़ ममता का कहना है कि नौ सप्ताह की प्रेग्नेंसी के बाद किसी तरह की कोई गर्भपात की दवा नहीं खिलानी चाहिए। इससे महिला को जान का खतरा रहता है। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाएं लेने जानलेवा हो सकता है
पीड़ित परिवार की तरफ से तहरीर नहीं मिली है। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। मामले से जुड़ी अन्य जानकारी भी जुटाई जा रही हैं। छात्रा किन परिस्थितियों में हॉस्टल पहुंची, इसकी भी जांच की जा रही है। तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - डीसीपी प्रमोद कुमार