शोरगुल सुनकर चंदन भी बाहर आ गया। तभी पुलिस चंदन को पकड़कर थाने ले जाने लगी। इस पर उसका बड़ा भाई नारद उर्फ नरेंद्र पासवान ने सुबह ले जाने की बात कहकर छोड़ने के लिए कहा। पुलिस की नोकझोंक के बीच बड़े भाई की पिटाई की ओर धक्का देकर गिरा दिया। इसके बाद उसके छोटे भाई को थाने लेकर चली गई।
तब तक घर के लोग भी मौके पर पहुंच गए और जमीन पर गिरे नारद को चारपाई पर लिटा दिया। हालत बिगड़ने पर नजदीक के डॉक्टर के पास ले गए। कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। इधर सुबह नारद की मौत की सूचना मिलते ही पुलिस ने चंदन को थाने से छोड़ दिया।
देखते ही देखते मृतक के दरवाजे पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी हो गई। जबकि कुछ देर बाद पहुंची पुलिस काफी मशक्कत के बाद शव कब्जे में लेकर थाने आई, लेकिन लोगों ने वहां पहुंचकर हंगामा करना शुरू कर दिए। मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस ने शव को बिना सील किए ही जनपद मुख्यालय के लिए रवाना कर दिया।
इधर आक्रोशित ग्रामीणों व परिजनों ने आंबेडकर प्रतिमा के सामने गाजीपुर-मऊ मार्ग पर सुबह दस बजे जाम लगा दिया। पुलिस के काफी समझाने-बुझाने पर करीब एक घंटे बाद 11 बजे जाम समाप्त हुआ। इस संबंध में कासिमबाद सीओ महिपाल पाठक ने बताया कि पुलिस पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद हैं। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी।