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राम भक्ति से ही मुक्ति संभव

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सुहवल। संत मानदास बाबा मंदिर परिसर में नौ दिवसीय 25 कुंडीय लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का समापन भंडारे एवं प्रवचन से हुआ। कथा वाचिका रागिनी सरस्वती ने श्रद्धालुओं को रामकथा का रसपान कराते हुए कहा कि राम भक्ति से ही मुक्ति संभव है। कथा मानव को मृत्यु के भय से मुक्त कर देती है। उन्होंने कहा कि जिन पर परमात्मा की विशेष कृपा हुई है, वही इस कथा मंडप में पहुंचे हैं। जीव ईश्वर का स्वरूप होते हुए भी ईश्वर को पहचानने का प्रयत्न नहीं करता है। इसी कारण उसे आनंद की प्राप्ति नहीं होती है। रामकथा भक्ति का आदर्श है। रामकथा ज्ञान, वैराग्य को जागृत करने की कथा है। रामकथा से आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही मंडप परिक्रमा से चौरासी योनियों के बंधन से मुक्ति मिलती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। मलसा : राधा-माधव ट्रस्ट सब्बलपुर में आयोजित देवी भागवत पुराण कथा में भागवताचार्य चंद्रेश महाराज ने कहा कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश के द्वारा सृजन, पालन एवं संहार का कार्य संपादित किया जाता है। इन तीनों को सृष्टि सृजन, सृष्टि के चर-अचर के पालन-पोषण एवं संहार की शक्ति जिससे प्राप्त होती है वह आदिशक्ति जगत जननी है। बिना शक्ति के शिव भी शव के तुल्य हैं। संसार में जो कुछ भी चलायमान है, गति है, हलचल है उसके पीछे शक्ति की ही भूमिका है। क्षमा, दया, ममता, शांति, बुद्धि, भक्ति जिस भी भूमिका में कोई भाव या स्वरुप हम अवलोकन अथवा अनुभव करते हैं वह आदिशक्ति का अंश है।
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