गाजीपुर। सनातन धर्म में कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर्व महत्वपूर्ण स्नानों में से एक है। इसे लेकर मंगलवार को जनपदवासी परंपरागत ढंग से पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ भोर से ही गंगा तट पर पहुंचने लगे। घाटों पर श्रद्धालुओं के आने और जाने का सिलसिला पूर्वांह्न दस बजे के बाद तक चलता रहा। घाटों पर लोगों ने स्नान के बाद पंडितों को दान -पुण्य किया। इस बीच घाटों पर भीम (भीष्म पंचक) की प्रतिमा भी बनाई गई। जिसे पूजे जाने की परंपरा चली आ रही है। एक मास तक लगातार कार्तिक स्नान करने वाले लोगों ने घाटों पर इस परंपरा को निभाते हुए फल, सब्जी, अनाज, ईख आदि का दान किया। सात प्रकार के अनाज की गठरी बनाकर उन्हें चढ़ाया गया।
पर्व के चलते देवालयों पर भी लोगों की भीड़ बनी रही। भोर में ही वाहनों का दबाव बढ़ जाने से कई जगह जाम की स्थिति बन गई थी। सुरक्षा के लिए घाटों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। धार्मिक कार्यों के लिए कार्तिक का महीना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में स्नान के कई पर्व पड़ते हैं। यह महीना भगवान विष्णु को प्रिय है। पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्व होता है। प्रतिपदा, नवमी, एकादशी, द्वादशी, अमावस्या आदि तिथियों के अलावा पूर्णिमा बहुत ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से जहां समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं वही व्यक्ति को मोक्ष की भी प्राप्ति हो जाती है। इस स्नान के चलते शहर के ददरीघाट, महादेव घाट, कलेक्टरघाट, सिकंदरपुर घाट आदि पर भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी थी। घाटों के आस पास वाहनों की कतार लग गई थी। भीड़ की वजह से कई स्थानों पर जाम की भी स्थिति बन गई। स्नान के बाद घाटों पर मौजूद पंडितों से लोगों ने संकल्प कराया तथा दान आदि दिया। इस दिन ईख, सब्जी, फल तथा चावल के दान का काफी महत्व है। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार नगर के बच्छलपुरा घाट, सेमरा घाट, सुल्तानपुर घाट, बड़कीधारा, गौसपुर आदि घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालु पुरुष महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। घाटों पर महिलाओँ ने गंगा मइया के पारंपरिक गीत भी गाए। घाटों पर भीष्म पंचक की अस्थाई प्रतिमाएं बनाई गई थी जिनका लोगों ने पूजन अर्चन किया तथा सात प्रकार के अनाज की गठरी बनाकर तथा फल आदि चढ़ाया। वाहनों के खड़ा कर दिए जाने के कारण मुहम्मदाबाद-गाजीपुर मार्ग पर गौसपुर के पास जाम की स्थिति बन गई थी। भावरकोल संवाददाता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर क्षेत्र के शेरपुर, सेमरा, वीरपुर, पलिया आदि गंगा घाटों पर भोर से ही स्नानार्थियों का तातां लगा रहा। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दान दक्षिणा कर पुण्य अर्जित किया तथा परिवार के कल्याण की कामना की। क्षेत्र के कुंडेश्वर में अति प्राचीन दो दिवसीय ददरी मेला का शुभारंभ हुआ। मेले में सुरक्षा के लिहाज से थानाध्यक्ष शैलेश सिंह यादव सदल बल चक्रमण करते दिखे। मेले में चरखी एवं कठघोड़वा आदि झूले का बच्चों ने आनंद लिया। मेले में चाट, मिठाइयां, जलेबी आदि की लोगों ने जमकर खरीदारी की। नंदगंज संवाददाता के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई तथा मंदिरों में मत्था टेका और पूजन अर्चन किया। भोर से ही श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हुआ जो अपराह्न तक बना रहा। स्नान के बाद लोगों पंडितों को फल अनाज आदि दान किया। इस अवसर पर चोचकपुर मौनी बाबा धाम पर विशाल मेला लगा। लोगों ने मौनी बाबा एवं अहिरिनिया माई के दर्शन के लिए काफी भीड़ उमड़ी। यहां के मौनी बाबा ने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को धाम परिसर में ही जीवित समाधि लिया था। पांच दिन चलने वाले इस मेले में चौकी, बेलना, मचिया, साड़ी, कपड़ा, जलेबी, खिलौना, बांसुरी, श्रृंगार का समान, पत्थर की बनी सील-लोढ़ा आदि परंपरागत और घरेलू सामानों की जबरदस्त बिक्री होती है। मनोरंजन के लिए चरखी, जादूगरी, बच्चों के खेल से संबंधित दुकानें भी लगी है।जमानिया संवाददाता के अनुसार नगर के उत्तर वाहिनी मां गंगा के परशुराम जमदग्नि ऋषि घाट उर्फ बलूआ घाट पर सुबह से स्नानार्थियों की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डूबकी लगाई तथा परंपरा के अनुसार दान पुण्य किया। विभिन्न शिवालयों में भी पूजन अर्चन को लेकर भीड़ बनी रही। घाटों पर पुलिस प्रशासन की ओर से महिला- पुरुष सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। सैदपुर संवाददाता ने बताया कि स्थानीय घाटों पर भी दूरदराज से स्नान के लिए श्रद्धालु पहुंचे। इसी प्रकार देवकली, सिधौना आदि क्षेत्रों में गंगाघाटों पर भीड़ उमड़ी।