पिछले दो दिनों से हुई तेज बारिश और हवा के झोंकों से खेतों में लहलहा रही फसलें बर्बाद हो गई हैं। दो दिनों में जिले के विभिन्न हिस्सों में 6.5 मिली मीटर वर्षा रिकार्ड की गई है। इस बारिश से खास तौर से दलहनी और तिलहनी फसलों के साथ गेहूं जौ तथा आलू की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल गिरने से दाने कमजोर होने की आशंका है। प्राकृतिक आपदा से किसानों के अरमानों पर एक बार फिर से पानी फिर गया है। कृषि विभाग की ओर से क्षति का आंकलन कर शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
कृषि विभाग के मुताबिक इस बार जिले में पौने दो लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई है जबकि 25 हजार हेक्टेयर में दलहनी और तिलहनी की खेती हुई है। बीते रविवार और सोमवार को जिले के विभिन्न हिस्सों में 6.5 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई है। बारिश के साथ तेज हवा के झोकों से खेतों में लहलहा रही गेहूं, जौ, अरहर की करीब 25 फीसदी फसल लोट गई है। इसके चलते गेहूं और जौ के दाने हल्के हो सकते हैं और उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। तेज बारिश से अरहर के फूल झड़ गए हैं।
इससे पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। सबसे ज्यादा दलहनी-तिलहनी फसलों में अरहर, मसूर, सरसों को नुकसान हुआ है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो खेतों में पानी लगने से पक चुकी मसूर तथा आलू सड़ सकती है। आलू का भंडारण भी प्रभावित होगा। सब्जी की फसलों मेें मूली, पालक गल सकती है और परवल के फूल झड़ जाने से भी परवल की खेती भी चौपट हो गई है। ग्रीष्मकालीन टमाटर की फसल को भी काफी नुकसान हुआ है। इसको लेकर किसान खून के आंसू बहाने को मजबूर हो गए हैं। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार प्रजापति ने बताया कि बारिश से हुई फसलों की क्षति का आंकलन कर शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी।