भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने गुरुवार को दोपहर करीब बारह बजे चकबंदी विभाग में तैनात कानूनगो तथा लेखपाल को रंगे हाथ पांच हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार कर लिया। कोतवाली में लिखा-पढ़ी के बाद लेखपाल और कानूनगो को वाराणसी ले लिए भेज दिया गया। रिश्वतखोरों को छुड़ाने के लिए मौके पर मौजूद उनके सहयोगी चकबंदी कार्यालय के कुछ कर्मचारियों ने एंटी करप्शन टीम के लोगों से मारपीट भी की।
बिरनो के गोपालपुर गांव निवासी दिवाकर पांडेय ने चार बीघा खेत की पैमाइश कराने के लिए पिछले वर्ष 16 अक्तूबर को चकबंदी विभाग में अर्जी दी थी। 26 अक्तूबर को खेत की पैमाइश करने के लिए लेखपाल और कानूनगो को सीओ ने पैमाइश करने का आदेश जारी किया था। बावजूद इसके पैमाइश करने में लेखपाल और कानूनगो रिश्वत के लिए दिवाकर को दौड़ाया जाता रहा। बाद में लेखपाल और कानूनगो पैमाइश के लिए दिवाकर से 10 हजार रुपये की मांग की। परेशान होकर दिवाकर ने 27 जून को वाराणसी पहुंचकर एंटी करप्शन टीम के प्रभारी प्रेमशंकर दूबे को शिकायती पत्र सौंपा।
इसके बाद टीम ने दोनों रिश्वतखोरों को रंगेहाथ दबोचने की प्लानिंग बनाई। प्लानिंग के तहत टीम के प्रभारी रामसागर गुरुवार की दोपहर शहर के शास्त्रीनगर स्थित चकबंदी आफिस पहुंचे। और पीड़ित दिवाकर को लेखपाल और कानूनगो को पांच हजार रुपये अभी और बाद में पांच हजार घूस देने की बात कही। एक चाय की दूकान पर दिवाकर ने जैसे ही लेखपाल और कानूनगो को 25-25 सौ रुपये दिया, वैसे ही पास में मौजूद एंटी करप्शन की टीम ने कानूनगो आजमगढ़ जिला के कंधरापुर थाना क्षेत्र के कड़ेनुआ गांव निवासी प्रेमचंद्र राम तथा मऊ जनपद के रानीपुर थाना क्षेत्र के पलिया गांव निवासी लेखपाल सलाउद्दीन को पकड़ लिया। तभी वहां मौजूद कुछ कर्मचारी टीम के सदस्यों को बाहरी समझकर मारपीट करने लगे। टीम के अधिकारियों के परिचय देने पर वे वहां से हट गए। टीम कानूनगो और लेखपाल को कोतवाली लाई। यहां पर लिखा-पढ़ी करने के बाद दोनों को लेकर वाराणसी चली गई। टीम के इंस्पेक्टर रामसागर ने बताया कि रिश्वत के 500-500 रुपये के दस नोट थे। रिश्वतखोरों को छुड़ाने के लिए मारपीट करने वाले चकबंदी कार्यालय के कर्मचारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।