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लूट के लिए की गई थी सराफ सुशील की हत्या

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गाजीपुर। सर्राफ सुशील की हत्या लूट के लिए की गई थी। चर्चित सर्राफ हत्याकांड के आरोपियों को सदर कोतवाली पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने मुठभेड़ के बाद दबोच लिया। उनके पास उनके पास से दो तमंचा, छह कारतूस, एक मोबाइल, पैन कार्ड, लूट का 11 हजार पांच सौ नकदी, एक बाइक और एसबीआई स्टेंटमेंट बरामद किया। यह जानकारी एसपी यशवीर सिंह ने रविवार को पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता के दौरान दी। बताया कि बदमाशों ने पूछताछ में इस बात का खुलासा किया है कि सर्राफ की हत्या लूट के लिए की गई थी।
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उन्होंने बताया कि शनिवार की रात में क्राइम ब्रांच प्रभारी निरीक्षक राजीव सिंह को सूचना मिली कि दो अपराधी बाइक से जंगीपुर किसी घटना को अंजाम देने जा रहे हैं। सूचना पर पुलिस ने बिलैचिया तिराहे पर अपना जाल बिछा दिया। भोर में पौने पांच बजे बाइक सवार दो व्यक्ति नजर आए। पुलिस ने उनको रुकने का इशारा किया। दोनों बदमाश बाइक घुमाकर भागने लगे। पुलिस ने उनका पीछा किया तो पीछे बैठे बदमाश ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। बाइक असंतुलित होने से दोनों गिर पड़े। पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया।
पूछताछ में दोनों ने अपना नाम बहरियाबाद थाना क्षेत्र के सरसौता गांव निवासी अभिषेक उर्फ बंटी राम तथा भुड़कुड़ा थाना क्षेत्र के बुढ़ानपुर गांव निवासी शशिभूषण सिंह बताया। उन्होंने बताया कि बीते 21 सितंबर की रात सदर कोतवाली क्षेत्र क्षेत्र टैक्सी स्टैंड के पास स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान के बाहर लूट के लिए गोली मारकर सर्राफ सुशील वर्मा की हत्या की थी। उनकी निशानदेही पर दो तमंचा, छह कारतूस, एक मोबाइल, पैन कार्ड, लूट का 11 हजार पांच सौ नकदी, एक बाइक और एसबीआई स्टेंटमेंट(जिसमें लूट के बाद लूट का 25 हजार जमा किया गया), छह नया कपड़ा बिल-बाउचर के साथ बरामद किया। एसपी ने बताया कि गिरफ्त में आए बदमाशों के खिलाफ गाजीपुर और वाराणसी में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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दुकान से ही पीछे लग गए थे अपराधी
गाजीपुर। पुलिस के हत्थे चढ़े अभिषेक उर्फ बंटी ने पूछताछ में बताया कि वह ओमप्रकाश बिंद उर्फ बक्सी, आशीष यादव, आशीष पासी तथा अजीत कौआ के साथ जिला कारागार में एक ही बैरक में बंद थे। जमानत एवं वकील की फीस में ज्यादा पैसा लगने के कारण हम लोगों ने तय किया था कि अच्छे व्यापारियों के साथ ताबड़तोड़ लूट की घटनाओं को अंजाम देंगे और जो खर्च होगा उसकी भरपाई करेंगे।
पुलिस को अभिषेक ने बताया कि ओमप्रकाश बिंद उर्फ बक्सी, आशीष एवं आशीष पासी जेल से छूट गए, जबकि अजीत कौआ जेल में ही था। बाहर निकलते ही हम लोगों ने ओमप्रकाश बिंद की सूचना पर 21 सितंबर को लूट की घटना को अंजाम देने के लिए सर्राफा कारोबारी सुशील वर्मा की स्टेशनरोड स्थित दुकान से ही पीछे लग गए थे। रोडवेज के आगे टैक्सी स्टैंड पर स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान पर कारोबारी बाइक से रूका और शराब लेने लगा। इसी दौरान ओमप्रकाश बिंद ने उसे गोली मारकर बैग लूट लिया। बैग देखा कि उसमें लाकर एवं दुकान की चाभी, टूटे जेवरात के कुछ टुकड़े थे, जिसे ओमप्रकाश ने रख लिया।
लूट की घटनाओं में रहे शामिल
बताया कि 23 अक्तबूर को थाना सादात क्षेत्र के ससना नहर के पास एक व्यापारी से 72 हजार रुपया, पैनकार्ड एवं एक मोबाइल हम दोनों ने सुनील यादव के साथ लूटा था। 26 अक्तूबर को थाना जहानागंज जनपद आजमगढ़ क्षेत्र के डिगरसंदी गांव के पास इलाहाबाद बैंक ग्राहक सेवा कर्मचारी से 89 हजार हम दोनों ने राजू उर्फ पप्पू यादव के साथ मिलकर लूट लिया था। 27 अक्तूबर को दुल्लहपुर थाना क्षेत्र के बहलोलपुर गांव के पास ग्राम पंचायत अधिकारी से 9500 रुपये और एक लूट की घटना को अंजाम दिया था।


फर्जी खुलासे का लगाया आरोप
गाजीपुर। न्यू अखिल भारतीय स्वर्णकार समाज एवं सर्राफा व्यपार मंडल के पदाधिकारियों का दावा है कि पुलिस द्वारा रविवार को सर्राफा कारोबारी सुशील वर्मा हत्या व लूटकांड का पर्दाफाश फर्जी है। पुलिस ने झूठी व मनगढंत कहानी बनाकर खुलासा किया है। कारोबारियों का कहना है कि पुलिस घटना के बाद बहुत दिनों तक आशनाई की बात कहकर मामले को दबाए हुई थी और मुलाकात करने पर टालमटोल कर रही थी। जबकि नगर के पेट्रोल पंप की छिनौती में पकड़े गए अपराधी को इस घटना से जोड़कर लूट के लिए सर्राफा कारोबारी हत्याकांड का भी खुलासा कर दिया है। पुलिस के फर्जी खुलासे से आक्रोशित कारोबारी डीजीपी लखनऊ से मिलकर सही खुलासे तथा न्याय की गुहार लगाएंगे। पुलिस पर आरोप लगाने वालों में दिलीप कुमार आर्य, संजय कुमार वर्मा, राजेश कुमार, संतोष कुमार, सुनील रकुमार, विरेश राम, संतोष कुुमार, दिनेश कुमार वर्मा, जयप्रकाश, जवाहर वर्मा, संजय अग्रहरी आदि शामिल हैं।
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