भांवरकोल। थाना क्षेत्र के बलुआं गांव में गुरुवार को दिन में अज्ञात कारणों से एक झोपड़ी में आग लग गई। अंदर मौजूद बड़ी बहन भाई को बचाने में झुलस गई। वह किसी तरह जान बचा कर बाहर भागी। ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद आग पर किसी तरह काबू पाया, लेकिन तब तक मासूम की झुलस कर मौत हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
क्षेत्र के बलुआं गांव रामबहादुर राम पत्नी सहित तीन बच्चों का गुजर-बसर झोपड़ी में रह कर करता है। गुरुवार की सुबह वह पत्नी रंभा के साथ खेत में मजदूरी करने के लिए मिर्चा की तोड़ाई के लिए चला गया। घर पर बेटा ओम (पांच), अमन (सात) और पुत्री सोनम (12) मौजूद थे। अमन झोपड़ी के बाहर खेल रहा था। जबकि ओम और सोनम झोपड़ी के अंदर थे। इसी दौरान दिन में करीब साढ़े 12 बजे अज्ञात कारण से झोपड़ी में आग लग गई। यह देख आनन-फानन में सोनम छोटे भाई ओम को झोपड़ी से बाहर निकालने में जुट गई। इसी बीच आग की लपटें और तेज हो गईं। बावजूद वह भाई को बचाने में जुटी रही और हल्के रूप से झुलसते हुए भाग कर झोपड़ी से बाहर निकल गई। आग लगने की शोर मचाने पर आसपास के लोग घरों से निकल कर मौके पर पहुंचे। जैसे ही सोनम ने लोगों को बताया कि छोटा भाई झोपड़ी के अंदर है, लोग शोर-शराबा के बीच आग बुझाने में जुट गए। ग्रामीणों की सूचना पर रामबहादुर भी पत्नी के साथ वहां पहुंच गए। जब तक ग्रामीणों ने आग पर काबू पाया, तब तक मासूम ओम की झुलस कर मौत हो गई। शव पर नजर पड़ते ही माता-पिता सहित भाई-बहन चीख-पुकार करने लगे। लोगों ने दुर्घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने परिजनों से पूछताछ करने के बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मौके पर पहुंचे लेखपाल ने पीड़ित से घटना की जानकारी ली।
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घटना का मंजर मृतक ओम की बड़ी बहन सोनम की आंखों में साफ झलक रहा था। वह पूरी तरह से सहमी हुई थी। कभी रोते-रोते शांत हो जा रही थी, तो कभी तेज आवाज में रोने लग रही थी। वह बिलखते हुए बार-बार यह कह रही थी कि अपने भाई को नहीं बचा सकी। बेटे की मौत से मां रंभा भी पूरी तरह से बेसुध पड़ी थी। दोनों बच्चों को गले लगा बिलख रही थी। मासूम की मौत से हर कोई दु:खी था। लोग दु:खी मन से आपस में यह बातें करते रहे कि संयोग था कि अमन झोपड़ी के बाहर खेल रहा था और सोनम जान बचा कर किसी तरह से जलती झोपड़ी से बाहर निकल गई, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।