नंदगंज। थाना क्षेत्र के धरवां स्थित एक गैस गोदाम के पास मंगलवार की सुबह एक प्राइवेट बस की जद में आकर स्कूटी सवार महिला की मौत हो गई। मृतका की गोद में बैठी उसकी दुधमुंही बच्ची और स्कूटी चला रहा देवर बाल-बाल गया। हादसे के बाद चालक बस छोड़कर फरार हो गया। घटना से गुस्साए लोगों ने मुआवजे की मांग को लेकर मौके पर जाम लगा दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर एक घंटा बाद जाम समाप्त कराया। शव के साथ ही बस को कब्जे में ले लिया।
धरवां गांव निवासी दूधनाथ की पत्नी गीता देवी (35) अपनी तीन माह की बच्ची और देवर जितेंद्र के साथ इलाज कराने और शादी का कार्ड बांटने के लिए शहर में आ रही थी। सुबह करीब नौ बजे धरवां गांव के पास स्थित एक गैस गोदाम के पास वाराणसी की तरफ से आ रही तेज रफ्तार प्राइवेट बस को ओवरटेक करने के दौरान स्कूटी में बस की टक्कर हो गई, जिससे स्कूटी असंतुलित होकर बाईं ओर पलट गई। जितेंद्र और गोद में मौजूद बच्ची भी बाईं तरफ गिर पड़े, जबकि गीता सड़क पर गिरी और बस का पहिया उसके सिर पर चढ़ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। देवर और बच्ची बाल-बाल बच गए। दुर्घटना के बाद आसपास के लोग मौके की तरफ दौड़ पड़े तो घबराया चालक बस छोड़कर फरार हो गया। आक्रोशित लोगों ने मुआवजे की मांग को लेकर गाजीपुर-वाराणसी मार्ग पर चक्काजाम कर दिया जिससे आवागमन ठप हो गया। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस छोटे-बड़े वाहनों को सहेड़ी से घुमाकर शादियाबाद रोड से रवाना करने लगी। लोगों को समझा-बुझाकर एक घंटा बाद जाम समाप्त कराया। पुलिस शव के साथ ही बस को कब्जे में लेकर थाना ले आई। थानाध्यक्ष विनीत राय ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मृतका के पति दूधनाथ की तहरीर पर अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसकी तलाश शुरु कर दी गई है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
मातम में तब्दील हुई शादी की खुशियां
गाजीपुर। मृतका गीता के देवर जितेंद्र का 22 नवंबर को तिलक और 28 नवंबर को शादी है। इसको लेकर घर में खुशी और उत्साह था। गीता अपने देवर के साथ उपचार और शादी का कार्ड बांटने के लिए घर से निकली थी, लेकिन रास्ते में कालरूपी बस की जद में आकर उसकी मौत हो गई। गीता के पांच बच्चे हैं, जिसमें बड़ी गरिमा (08), महिमा (06), अनामिका (04) गुड़िया (02) और तीन माह की दुधमुंही बच्ची है। गीता की मौत पर परिवार के लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पति दूधनाथ बच्चों का चेहरा देख बिलखते हुए बार-बार यह कह रहा था कि अब बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा। इस घटना से शादी की खुशियां मातम में तब्दील हो गई। गांव के लोग भी शोक में डूबते हुए घटना के लिए ऊपर वाले की दुहाई देते रहे।