भीमापार। स्थानीय गांव में ज्यादातर विकास कार्य केवल कागजों में कराए गए हैं। इतना ही नहीं, बिना काम कराए सरकारी धन भी खाते से उतार लिया गया है। इसकी शिकायत ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी सहित अन्य अफसरों से की गई। जिलाधिकारी के आदेश पर विकास कार्यों की जांच कराई गई लेकिन अभी तक दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि इस मामले में सीडीओ ने भी एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट तलब की है। इस संबंध में ग्रामीणों ने डीएम और सीडीओ से गुहार की है। ग्रामीण रतन गुप्ता ने सूचना के अधिकार के तहत गांव के विकास को लेकर सूचना मांगी थी। इसमें कई तथ्य चौंकाने वाले सामने आए। इसके बाद पूरे विकास कार्यों की जांच कराई गई है।
भीमापार गांव स्थित बाजार में बहुत से काम बिना कराए ही सरकारी धन खाते से उतारा गया है। इस नाली पर भी वित्तीय सत्र 2016-17 में पक्की नाली के लिए कुल 110766.00 रुपये तथा दोबारा उसी नाली को भूमिगत नाली के लिए कुल 353475.00 रुपये, नाली को बनाने के लिए कुल 464341.00 रुपये उतारा गया है। जबकि गांव में कोई नाली का निर्माण नहीं हुआ है। रतन गुप्ता ने 18 जनवरी 2019 को प्रार्थना पत्र डीएम को दिया था। जिलाधिकारी ने जिला पशु चिकित्साधिकारी और सहायक अभियंता देवकली पंप नहर खंड प्रथम को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया। 14 मार्च 2019 को जांच हुई और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजा गया। मौके पर तभी ग्राम प्रधान के छोटे भाई विजयभान यादव आकर जांचकर्ता और प्रार्थी को गाली गुप्ता देने लगे। इससे जांच को अधूरा ही छोड़ अफसर चले गए। पुन: तीसरे रिमाइंडर के बाद 26 जून को अधिकारियों ने खड़ंजा, नाली, शौचालय तथा हैंडपंपों की जांच गांव वालों की उपस्थिति की। जिसमें एक भी हैंडपंप रिबोर नहीं मिला लेकिन कार्रवाई अब भी अधर में लटकी हुई है। मुख्य विकास अधिकारी ने 19 जून ने कहा कि जांच अधिकारियों द्वारा जानबूझ कर प्रकरण को लंबित रखा जा रहा है। उन्होंने उक्त प्रकरण की जांच आख्या एक सप्ताह में प्रस्तुत करने का आदेश दिया। जांच रिपोर्ट समय से न देने पर आपके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई होगी। अब तक कोई भी जांच रिपोर्ट डीएम के समक्ष प्रेषित नहीं किया गया है। मुख्य विकास अधिकारी हरिकेश चौरसिया ने बताया कि विकास कार्य में किए गए गोलमाल की जांच की गई है। बहुत जल्द दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।