जखनिया। क्षेत्र के सिद्धपीठ हथियाराम मठ में 60 दिनों से चल रहे चातुर्मास रुद्र महायज्ञ अनुष्ठान का समापन शनिवार को होगा। सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर पवहारी महंथ भवानीनंदन यति महाराज ने बताया कि देश में चातुर्मास महाव्रत संन्यासियों का सबसे बड़ा महाव्रत है। इसमें 60 दिनों तक साधना-आराधना और अति रुद्रात्मक अनुष्ठान किया जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में पितरों के लिए पिंडदान करना चाहिए। पितृ पक्ष के दौरान व्यक्ति को सात्विक भोजन करना चाहिए। शुद्ध विचार एवं ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। पिता, दादा, परदादा ने हमें जन्म दिया है तो उन्हें तारने का कार्य हमें श्राद्ध, तर्पण और शुद्ध विचारों से करना चाहिए। अपने पितरों को खुश करने के बाद परिवार में तमाम प्रकार की खुशहाली होती है। सिद्धपीठ में अनुष्ठान का समापन वैदिक विद्वानों की ओर से सुबह 8 बजे हवन-पूजन के साथ संपन्न किया जाएगा। सुबह 9 बजे से विद्वत सभा का आयोजन होगा। इसके बाद महा भंडारा का आयोजन किया गया है। इस मौके पर डॉ. रत्नाकर त्रिपाठी, शिवानंद सिंह, अमिता दुबे, सर्वेशचंद्र पांडेय, सुनील सिंह आदि मौजूद थे।