चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी के बीच समस्याओं से परेशान फरियादी सुबह नौ बजे ही सातों तहसीलों पर आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस पर फरियाद सुनाने के लिए पहुंच गए थे, लेकिन अधिकांश लोगों को मायूस होकर घर वापस लौटना पड़ा। वजह 591 प्रार्थना पत्रों में मात्र 46 का ही मौके पर निस्तारण हो पाया। इधर कासिमाबाद ब्लॉक के महाराणा प्रताप सभागार में फरियादियों की समस्याओं को सुनने के लिए बैठी डीएम आर्यका अखौरी एवं एसपी ओमवीर सिंह के सामने 80 प्रार्थना पत्र तो आए, लेकिन मौके पर मात्र तीन का ही निस्तारण हो सका। जबकि परिसर में करीब 200 से 250 लोगों की भीड़ लगी हुई थी। काउंटर पर पंजीकरण नहीं करा पाने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। सैदपुर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस पर 88 में सात, जमानिया में 90 में नौ, सदर तहसील में 64 में नौ, मुहम्मदाबाद में 83 में पांच, सेवराई में 77 में सात, जखनिया में 109 में मात्र छह का ही मौके पर निस्तारण किया गया। इधर जिलाधिकारी ने संपूर्ण समाधान दिवस में प्राप्त प्रार्थना पत्रों से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि अविलंब मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करते हुए निस्तारण किया जाए। उन्होंने सार्वजनिक भूमि, तालाब, सरकारी भूमि, ग्राम समाज के भूमि पर अवैध अतिक्रमण को एक अभियान चलाकर अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया। साथ ही आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों को आगामी तीन दिन में शत-प्रतिशत निस्तारण करने का निर्देश दिया। इसमें लापरवाही पर संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य, उपजिलाधिकारी कासिमाबाद, तहसीलदार कासिमाबाद एवं समस्त जनपदस्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री आवास मिला है। अपने पैतृक भूमि पर आवास बनाना चाहता हूं, लेकिन पड़ोसियों द्वारा बनवाने नहीं दिया जा रहा है। जबकि इस समस्या को लेकर थाना समाधान दिवस और संपूर्ण समाधान दिवस पर अधिकारियों के यहां प्रार्थना-पत्र देकर गुहार लगाई गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।- बहादुर बिंद, मुस्सलहपुर।
जमीन संबंधित विवाद है। जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। कई बार शिकायती पत्र देकर गुहार लगाया गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। यह संपूर्ण समाधान दिवस अब सिर्फ तहसीलों में भीड़ जुटाने और प्रार्थना-पत्रों का ढेर लगाने संबंधित रह चुका है।- सुधीर कुशवाहा, बिशुनपुर ।
राजपुर मौजा में खेत है। उससे सटे ताल की आराजी है। ताल की जमीन पर अवैध रूप से लोगों ने घर बना लिया है। इसके बाद अब दबंगों द्वारा खेत में भी अतिक्रमण करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। लेखपाल हो चाहे तहसील के उच्चाधिकारी कोई सुनने वाला नहीं है। संपूर्ण समाधान दिवस में सिर्फ प्रार्थना पत्र ले लिया गया, कोई सुनवाई नहीं हुई। - लालजी खरवार, दहेंदू
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गांव में ही पट्टे की भूमि काफी दशकों पहले मिली थी। करीब पांच माह पूर्व पैमाइश के साथ पत्थर गड़ी भी हो गई थी। जबकि विरोधियों द्वारा उखाड़कर फेंक दिया गया। शिकायत के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही विरोधियों द्वारा उस पर कब्जा करने दिया जा रहा है। - उर्मिला देवी, पंडितपुरा मरदह