गोराबाजार स्थित नए जिला अस्पताल में मरीजों को महीनों से दवाएं नहीं मिल रही हैं। दवा के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। आलम यह है कि चिकित्सकों द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं में से ज्यादातर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही है। मंगलवार को जिला अस्पताल का दवा काउंटर तीन घंटे विलंब से खुला।
जबकि मरीज सुबह से दवा लेने के लिए बैठे थे। पूर्वाह्न 11 बजे दवा काउंटर खुला भी तो किसी भी मरीज को पूरी दवा नहीं मिली। दर्जनभर से अधिक मरीज बिना दवा के ही लौट गए। दवा वितरण की व्यवस्था बेपटरी होने से नाराज लोगों ने काउंटर के पास जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रशासन के विरोध में नारेबाजी की।
जनपद के विभिन्न इलाकों से लोग इलाज और दवा लेने जिला अस्पताल पहुंचे थे। बावजूद काउंटर काफी विलंब से खुलने के कारण लोगों इधर-दधर भटकते रहे। मरीज और तीमारदारों से यह कहा गया कि स्टाक में दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। सुबह आठ बजे की जगह पूर्वाह्न 11 बजे दवा काउंटर खोला गया। इसके बाद लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया।
मंगलवार को ओपीडी में मरीजों की संख्या अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक थी। चिकित्सकों द्वारा दवा लिखने के बाद दवा लेने के लिए जब काउंटर पर पहुंचे तो वहां काउंटर बंद मिला। समय से दवा काउंटर न खुलने से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। बहुत सारे मरीज मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर चले गए।
लेकिन बहुत लोग दवा स्टोर खुलने का इंतजार करते रहे। दिन के 11 बजे दवा काउंटर खुला, लेकिन काउंटर खुलने के बाद भी मरीजों को दवा नहीं मिल सकी। भीड़ काउंटर के पास जुटी रही। इस तरह कुछ मरीजों को आधी-अधूरी दवाएं मिलीं और
बाद में दवा काउंटर पर बैठे कर्मियों ने यह कह कर मरीजों को दवा देने से इंकार कर दिया कि अब स्टाक में दवाएं नहीं हैं और दोबारा काउंटर बंद कर दिया गया। इसके बाद तीमारदारों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और जमकर नारेबाजी की। हो-हल्ला के एक घंटे बाद किसी तरह दवा काउंटर खुला और तब जाकर लोगों का गुस्सा शांत हुआ।