हसनपुर डगरा में इकट्ठा कूड़ा-कचरा-संवाद
गाजीपुर। जनपद में 1238 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों को स्वच्छ रखने के लिए 3298 सफाइकर्मियों की तैनाती है। इनके वेतन पर हर महीने 15.17 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद गांवों के खाली प्लॉट कूड़ा घर बने हैं। कई जगह प्लॉटों में कूड़े का अंबार है, जबकि फाइलों में सब साफ है। जनपद की 1238 ग्राम पंचायतों में तैनात सफाइकर्मी नियमित सफाई करने के लिए नहीं आते हैं। इसकी गवाही गांवों में सार्वजनिक स्थानों व खाली प्लॉटों पर लगे कूड़े के अंबार दे रहे हैं।
अधिकारियों से शिकायत के बाद भी सफाइकर्मी गांवों में ड्यूटी करने नहीं आते हैं। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। जखनिया के ऋषिकेश कन्नौजिया, पारस, विमला आदि का कहना है कि गांवों में सफाई के लिए सफाइकर्मी नहीं आते हैं। कूड़ा उठान नहीं होने के कारण खाली प्लॉटों व सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े का ढेर लगा हुआ है। इससे स्वच्छता मिशन को धक्का लग रहा है। जखनिया में खाली प्लॉटों में जलभराव की स्थिति है। खाली प्लॉटों में जलभराव की स्थिति मच्छरों के लिए मुफीद पनाहगार बन चुकी है। सोनबरसा में खाली प्लॉट पर कूड़े का ढेर लगा है। हसनपुर डगरा में भी यही हाल है। वहीं कूड़ा निस्तारण के लिए जनपद के गांवों में 700 आरआरसी बनाए गए हैं। ऐसी व्यवस्था होने के बाद भी लापरवाह सफाइकर्मियों के कारण गांव कूड़े से पटे नजर आ रहे हैं।
बीडीओ आवास का जर्जर भवन कूड़ा घर बना
कासिमाबाद के बीडीओ आवास का जर्जर भवन कूड़ाघर बन चुका है। यहां कूड़े का अंबार लगा है। कूड़े के दुर्गंध व बदबू से आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
खाली प्लाॅट में कूड़ा भरा
औड़िहार में सड़क किनारे खाली प्लॉट में कूड़ा भरा हुआ है। इससे इतनी तेज बदबू आती है कि आने-जाने वाले राहगीर नाक पर रुमाल रखकर आवागमन करते हैं।
सफाई के लिए गांवों में सफाइकर्मियों को पहले से ही निर्देश दिया गया है। यह उनका कार्य है। इसके बाद भी अगर कही कूड़े का ढेर मिलता है, तो जांच करके संबंधित सफाइकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - रमेशचंद्र उपाध्याय, डीपीआरओ।