कठवामोड़। सदर शिक्षा क्षेत्र में पड़ने वाले प्राथमिक विद्यालय फतेहपुर अटवा की दशा अति दयनीय है। पूरा भवन जर्जर है। दीवारें जगह-जगह से फट गई हैं। हल्की बरसात होने पर शिक्षकों और छात्रों की सांसें अटकी रहती हैं। विद्यालय में दो शौचालय है जो जगह-जगह से टूटे-फूटे हैं। उसमें पानी का अभाव है। एक में हमेशा ताला बंद रहता है। हैंडपंप गंदा पानी उगल रहा है। जिससे पेयजल की भी दिक्कत है। कभी-कभी बच्चे बाहर मैदान में पढ़ाई करते हैं। साफ -सफाई के अभाव में इसके चारों तरफ तथा परिसर में गंदगी फैली रहती है, जिससे बच्चों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है।
सन 1957 में स्थापित इस प्राथमिक विद्यालय में कुल 149 छात्र पंजीकृत हैं। यहां चार कमरे तथा एक बरामदा है। इसमें पांच तक की कक्षाएं चलाई जाती है। कई बार बच्चों को बाहर बरामदे में या मैदान में जमीन पर बैठाकर पढ़ाया जाता है। भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया है। छत के प्लास्टर गिरते रहते हैं। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हो गई हैं। स्थापना के बाद से इस विद्यालय की अब तक मरम्मत नहीं कराई गई है। तत्कालीन प्रधानाचार्य कामाख्या नारायण सिंह ने वर्ष 2018 में किसी तरह विभाग से कह सुन कर हल्की मरम्मत कराई थी। यहां शौचालय तो है, लेकिन उसकी दशा अति दयनीय है। सीट और दरवाजे टूटे हुए हैं। पानी की व्यवस्था नहीं है। एक शौचालय हमेशा बंद रहता है। बच्चों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। विद्यालय में एक हैंडपंप है, वह भी गंदा पानी उगल रहा है। मिड डे मील खाने के बाद छात्रों को पानी पीने के लिए भटकना पड़ता है। चहारदीवारी भी जगह जगह से टूटी हुई है। पानी निकासी की कोई उचित व्यवस्था नहीं होने से विद्यालय के अंदर बरसात का पानी की दिनों तक जमा रहता है।