भदौरा ब्लाक के कई गांवों में खसरे के मरीज मिल रहे हैं। यह बच्चों के लिए खतरनाक है। इससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नौ माह से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को एमआर (मीजल्स) का टीका लगवाने की तैयारी शुरू कर दी है। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग एवं डब्लूएचओ के अधिकारियों ने एएनएम और आशा कार्यकर्त्ताओं के साथ बैठक कर टीकाकरण के संबंध में जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग, डब्लूएचओ, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की बैठक में सीएचसी अधीक्षक भदौरा डा. धनंजय आनंद ने बताया कि खसरे के लक्षणों में बुखार का आना, सर्दी - जुकाम के साथ शरीर पर दाने या चकत्ते पड़ते हैं। अगर समय पर उपचार नहीं कराया गया तो दिमागी बुखार का भी खतरा हो सकता है, जो जानलेवा है। भदौरा ब्लाक के उसिया और बारा गांव में बीते दिनों दर्जनों बच्चे खसरे की चपेट में आकर बीमार हो गए थे। स्वास्थ्य विभाग और डब्लूएचओ की टीम ने खसरा पीड़ित बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाने के साथ ही स्वैब एवं ब्लड लेकर जांच के लिए भेजा था। वहीं, आशा कार्यकर्ताओं को गांव में सर्वे के लिए लगाया गया था कि कितने बच्चों को को खसरे का टीका नहीं लग पाया है। बताया कि खसरा होने के बाद बच्चों में निमोनिया, डायरिया भी हो जाता है। इससे बचाव के लिए नौ माह के बच्चों को खसरे का टीका लगवा देना चाहिए। डब्लूएचओ मानिटर अमित ने बताया कि खसरे से बचाव के लिए उसिया गांव में बृहस्पतिवार और बारा गांव में शुक्रवार को विशेष अभियान चलाकर नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को टीके लगाए जाएंगे।