गाजीपुर। जिले में बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की लत तेजी से बढ़ रही है। हालात यह हैं कि कई बच्चे रात में रजाई के अंदर मुंह छिपाकर मोबाइल पर गेम खेलते हैं। रोकने-टोकने पर वे झल्ला जाते हैं, चिल्लाने लगते हैं और स्वभाव में बदलाव भी दिखने लगा है।
महर्षि विश्वामित्र स्वायत्त राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में रोज 15 से 20 बच्चों की काउंसलिंग हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल के कारण यह समस्या गंभीर रूप ले रही है।
विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रदीप यादव के मुताबिक, गेम की लत लगने के बाद बच्चों को पढ़ाई, खेलकूद, नींद या परिवार के साथ समय बिताना अच्छा नहीं लगता। कई मामलों में पैसों की बर्बादी, झगड़े और पारिवारिक तनाव तक की नौबत आ जाती है। बताया कि माता-पिता को चाहिए कि बच्चों से खुलकर बात करें कि वे कौन-सा गेम खेल रहे हैं। खेलने के लिए रोजाना समयसीमा तय करें। मोबाइल/कंप्यूटर में पैरेंटल कंट्रोल का उपयोग करें। साथ ही बच्चों को हिंसक और जुए जैसे गेम्स से दूर रखें।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा ने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग की लत के दो से तीन बच्चे रोज आते हैं। कोई रात में रजाई में मोबाइल ऑन कर लेता है और रोकने पर झल्ला जाता है, तो किसी ने मां का अकाउंट खाली कर दिया है। काउंसलिंग की जाती है और जरूरत पर दवाएं भी दी जाती हैं, जिससे चिड़चिड़ापन कम हो।