स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए खास कदम नहीं उठाया जा रहा है। विशेष रूप से बच्चों के उपचार को लेकर। जिले की कई सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती नहीं है। जबकि ठंड का मौसम होने के कारण बच्चे मौसमी बीमारियों सर्दी, खांसी, बुखार से लेकर निमोनिया तक से पीड़ित हो रहे हैं।
जनपद में कुल 15 सीएचसी यानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें दो प्रमुख स्थानों सेवराई और मरदह सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। ऐसे में बच्चों के बीमार पड़ने पर इन क्षेत्रों के लोगों को 15 से 30 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला मुख्यालय आना पड़ता है या फिर निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। इससे उनकी जेब पर बोझ पड़ता है। वहीं जिला मुख्यालय आने पर समय की बर्बादी और परेशानी दोनों होती है। एसीएमओ डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि जहां डॉक्टरों की कमी है, उसे लेकर पत्राचार किया गया है।
भदौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़े गांवों में शामिल गहमर के लोग भी उपचार के लिए यहीं आते हैं लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से आर्थिक रूप से कमजोर लोगाें को अप्रशिक्षित डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ता है। गहमर के अलावा 20 से 25 गांव भदौरा सीएचसी पर उपचार के लिए निर्भर हैं।