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‘उगु न सुरुज देव भइलो अरग के बेर..’

Mon, 07 Nov 2016 10:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
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छठ पूजा
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लोक आस्था के पर्व डाला छठ पर महिलाओं ने निर्जल व्रत रख सोमवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दे पति और पुत्र की लंबी आयु की कामना की। सूर्य भगवान के उगने से पूर्व जिले के घाट ‘उगु न सुरुज देव भइलो अरग के बेर..।’ से गूंजते रहे। नगर के प्रमुख गंगा घाटों, तालाबों, पोखरों एवं अस्थाई पोखरों पर उत्सव सरीखा माहौल रहा। बच्चों से लेकर बड़े तक, सभी ने छठ पर्व  के उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
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सोमवार को भोर से ही व्रती महिलाएं पानी में खड़ी होकर आराधना शुरू कर दी। इन्हें जैसे ही सूर्यदेव की झलक मिली, उनके जयघोष के साथ दूध की धारा बहने लगी। सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार के सुख-समृद्धि  की कामना की गई। इस मौके पर सुरक्षा के कड़े प्रबंधक किए गए थे। उपासना के पर्व डाला छठ पर  सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए भोर के तीन बजे से ही व्रती महिलाओं के गंगा घाटों पर जाने का सिलसिला शुरू हो गया।
व्रती महिलाएं छठ मैया का गीत गाते हुए घाटों  पर पहुंची। चार बजते-बजते कलेक्टर घाट, ददरीघाट, चीतनाथ घाट, नवापुरा घाट, सिकंदरपुर घाट, अंजही घाट, मसूर घाट, पत्थर घाट, कोयला घाट, स्टीमर घाट, बड़ा महादेवा घाट, छोटा महादेवा घाट, गोलाघाट, पीरनगर घाट सहित अन्य गंगा श्रद्धालुओं से पूरी से पट गए। घाट पर पहुंची व्रती महिलाओं ने पूजा के लिए बनाई गई वेदी पर कलश स्थापित कर पूजन-अर्चन का कार्य प्रारंभ कर दिया।
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छह बजे से पहले सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए महिलाओं का गंगा सहित अन्य सरोवरों पर पहुंचने का क्रम शुरू हो गया। पानी में सूप लेकर खड़ी महिलाएं भगवान भाष्कर की झलक पानेे के लिए आसमान की तरफ निहारने लगे। 6.18 बजे सूर्योदय होना था, लेकिन आज सूर्यदेव का दर्शन करीब साढ़े छह बजे हुआ। सूर्य की झलक मिलते ही व्रती महिलाओं के अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की। व्रती महिलाएं अर्घ्य दे पुत्र, पति सहित परिवार के अन्य लोगों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद गंगा घाट से घरों को लौटी। पूजा समाप्त होने के बाद गंगा घाटों को जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा।
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