गाजीपुर। जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हृदयरोगियों के उपचार की कोई सुविधा नहीं है। सर्दियों के मौसम में करीब 70 प्रतिशत मरीजों की सिर्फ बीपी जांच और प्राथमिक उपचार कर रेफर कर दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि 16 सीएचसी में सिर्फ एक फिजिशियन तैनात हैं, जबकि हृदयरोग विशेषज्ञ की पद ही स्वीकृत नहीं है। ऐसे में 70-80 एमबीबीएस के भरोसे ही सामान्य से गंभीर बीमारियों का उपचार हो रहा है। सर्दी के दिनों में हृदय से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। सरकारी अस्पतालों में हृदय रोगों से पीड़ितों की संख्या भी बढ़ी है, लेकिन इलाज का समुचित इंतजाम नहीं होने के कारण लोगों को जनपद मुख्यालय, मऊ अथवा वाराणसी की ओर रूख करना पड़ता है। नोनरा निवासी संदीप ने बताया कि अगर मरदह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बात की जाए तो यहां से 10 से 12 किमी की दूरी पर मऊ है, जबकि करीब 25 किमी दूरी पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल है। जबकि सीएचसी पर सात से आठ किमी दूर से लोग बीमार पड़ने पर पहुंचते हैं, ऐसे में यहां सिर्फ बीपी जांच के बाद पानी का बोतल लगाकर रेफर कर दिया जाता है, मऊ अथवा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचते- पहुंचते हालत गंभीर हो जाती है। रेवतीपुर के राजू ने बताया कि रेवतीपुर और भदौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हृदयरोग संबंधित उपचार नहीं हो पाता है। उपकरण तो दूर विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं हैं। ऐसे में समय गंवाने से बेहतर सीधे मरीज को मेडिकल अस्पताल लेकर पहुंच जाते हैं, जहां हृदयरोग विशेषज्ञ और फिजिशियन की देखरेख उपचार होने लगता है। नोनहरा निवासी रामभवन ने बताया कि पूर्व में स्थिति तो यह थी कि हृदयरोगियों को उपचार के लिए वाराणसी लेकर जाना पड़ता था, लेकिन अब महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में उपचार मिल जाने से मरीज की जान बच जा रही है, जबकि सटे मुहम्मदाबाद सीएचसी पर हृदयरोग संबंधित उपचार की कोई व्यवस्था ही नहीं है।
सीएचसी पर तैनात चिकित्सकों द्वारा हृदयरोग से पीड़ित मरीजों की बीपी और प्राथमिक उपचार किया जाता है। 16 सीएचसी को ईसीजी मशीन उपलब्ध करा दी गई है, स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हृदयरोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत नहीं है, एक फिजिशियन हैं, जो बाराचवर में तैनात है। हालांकि हृदयरोग से जुड़े मरीजों को तत्काल उपचार मुहैया कराया जाता है। - डाॅ. एसके पांडेय, सीएमओ गाजीपुर।
रोज पहुंच रहे 15 से 20 मरीज, एक- दो हो रहे रेफर -गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि जिले के दूर-दराज इलाकों से इन दिनों प्रतिदिन 15 से 20 मरीज पहुंच रहे हैं। ठंड के बढ़ने से मरीजों की संख्या बढ़ी है। पूर्व में यह आंकड़ा करीब पांच से आठ ही थी। एंजियोग्राफी की व्यवस्था न होने से एक से दो मरीजों को वाराणसी रेफर करना पड़ रहा है। जबकि हृदयरोग विशेषज्ञ और तैनात नौ फिजिशियन द्वारा ऐसे मरीजों को वार्ड में भर्ती करके उपचार किया जा रहा है।
कार्डिया अल्ट्रासाउंड, ईसीजी और ईको जांच की है व्यवस्था-गाजीपुर। प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि हृदयरोग के मरीजों की जांच और उपचार दोनों किया जाता है। कार्डिया अल्ट्रासाउंड, ईसीजी और ईको की भी जांच व्यवस्था है। वहीं खून से जांच की व्यवस्था है। इसके अलावा हृदयरोग के गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए 10 बेड का आईसीयू भी है, जहां उन्हें भर्ती करके उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
सीएचसी पर हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है, ऐसे में मरीज को पास के दूसरे जनपद के अस्पतालों के तरफ रूख करना पड़ता है। सबसे बड़ी बात तो यह है मऊ जाने के लिए 10 से 12 किमी जबकि मेडिकल काॅलेज अस्पताल पहुंचने के 25 किमी दूरी तय करना पड़ती है। - संतोष कुमार पांडेय, महेंगवा
ठंड में हृदय रोग संबंधित मरीज बढ़ने लगते हैं, ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बीपी की जांच कर तत्काल रेफर कर दिया जाता है, इनके पास फिजिशियन तक तैनात नहीं हैं। ऐसे में दूसरे जगह जाते- जाते मरीज की स्थिति काफी खराब हो जाती है।- अजय यादव, कबीरपुर कंसहरी
बिरनो सीएचसी पर हृदयरोगियों का उपचार तो दूर की बात है, साधारण बीमारियों का उपचार असंभव है। यहां डॉक्टर बीपी की जांच कर जबतक अपनी अशंका व्यक्त करते हैं, तबतक मरीज की हालत गंभीर हो जाती है।- सत्येंद्र सिंह, भड़सर
ब्लाकों पर स्थापित सीएचसी पर हृदयरोग संबंधित कोई जांच की व्यवस्था नहीं है। यहां मरीज को लाने का कोई मतलब ही नहीं है। ऐसे में तीमारदार मरीजों को सीधे हायर सेंटर लेकर चले जाते हैं। - दिनेश गुप्ता, जरगो