भीमापार। कोरोना के चलते उपजी प्रशासनिक सक्रियता से सावन के पहले सोमवार को ही सैदपुर क्षेत्र के भीतरी क्षेत्र का चौमुखनाथ महादेव धाम का मंदिर पूरे दिन बंद रहा। रात के दो बजे से ही भीतरी पुलिस चौकी प्रभारी राकेश कुमार त्रिपाठी मंदिर के मुख्य द्वार पर दल बल के साथ डंटे रहे। बैरिकेडिंग के जरिए मंदिर के परिसर को सील कर दिया गया।
इसके चलते क्षेत्र के हजारों शिव भक्तों को निराश होना पड़ा। विभिन्न गांवों के कईं श्रद्धालुओं ने तो अपने गांव में ही स्थित छोटे शिवालयों में स्थापित पवित्र शिवलिंगों पर गंगाजल और दुग्ध का अभिषेक किया। इस दौरान शिव भक्तों ने महाकाल से कोरोना जैसी महामारी को पूरे विश्व से ही उखाड़ कर फेंक देने की गुहार लगाई। ध्रुवार्जुन गांव के राजकीय पुरस्कार से सम्मानित और अवकाश प्राप्त शिक्षक सूर्यदेव राय ने बताया कि चौमुखनाथ महादेव का इतिहास लगभग डेढ़ सौ साल पुराना है। उस समय गांव के बाहर जंगल में एक टीले पर इस चौमुखी शिवलिंग पर सबसे पहले चरवाहों की नजर पड़ी। वहां जब खुदाई की जाने लगी तो लगभग तीस फिट की गहराई के बाद जमीन से पानी तो निकल आया। लेकिन शिवलिंग की कोई सीमा निर्धारित नहीं मिल सकी। ऐसा चमत्कार देखकर भक्त प्रफुल्लित हो उठे। लोगों ने पवित्र शिवलिंग की वहीं स्थापना कर डाली। सूर्यदेव राय ने कहा कि वैसे तो सभी शिव मन्दिरों का अपना अपना महत्व है। लेकिन भीतरी क्षेत्र के चौमुखनाथ महादेव मन्दिर का तो इतिहास ही अनोखा है। कहते हैं कि इस मन्दिर में स्थापित चतुर्मुख शिवलिंग की सच्चे मन से जो कोई भी उपासना करता है, उसकी सारी मनोकामनायें पूरी होती हैं।