चांद पर तिरंगा लहराते ही खुशी से झूम उठा हर कोई
सफल लैंडिंग के लिए जगह-जगह हुए पूजा-पाठ, मंदिरों में हुई ईश्वर से प्रार्थना
कहीं मुंह मीठा कराया तो कहीं की गई आतिशबाजी
बच्चों ने स्कूलों में देखा चांद पर कदम रखते
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। चंद्रयान-तीन के चंद्रमा पर सफलतापूर्वक लैंडिंग के साथ ही देश ने विज्ञान के क्षेत्र में बुधवार को नई इबारत लिख डाली। चांद पर भारत का तिरंगा लहराने के लिए बेताब लोगों ने बुधवार को सुबह से ही चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए जगह-जगह पूजा पाठ और मंदिरों में ईश्वर से प्रार्थना की। यही नहीं शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल खोलकर बच्चों को कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाकर इस उपलब्धि को दिखाया गया। निर्धारित समय पर जैसे ही चंद्रयान 3 चांद पर पहुंचा बच्चे खुशी के मारे मानो सातवें आसमान पर पहुंच गए। इस मौके को लोगों ने उत्सव की तरह मनाया। तिरंगा लहराते हुए लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाए। आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया।
चंद्रयान-3 की लैंडिंग को लेकर लोगों में सुबह से ही काफी उत्सुकता थी। सुबह से ही कई जगहों पर विशेष पूजा-पाठ और मंदिरों में ईश्वर से प्रार्थना हुई। हर उम्र एवं वर्ग के लोग सुबह से ही इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। घरों के साथ विभिन्न क्षेत्रों के स्कूल एवं निजी संस्थानों में लोग टीवी के पास पांच बजे से ही डट गए थे। निर्धारित समय पर चंद्रयान-3 की लैंडिंग का गवाह बने। शाम को शहर में उत्साही लोगों ने जमकर आतिशबाजी की।
जमानिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के हेतिमपुर गांव स्थित एसएस देव पब्लिक स्कूल‚ लोदीपुर स्थित बुद्धम शरणम महाविद्यालय‚ सत्यम इंटरनेशनल स्कूल‚ सेंट्रल पब्लिक स्कूल‚ जीवपुर गांव स्थित ब्लॉसम एकेडमी स्कूल‚ कसेरा पोखरा गांव स्थित सन शाइन पब्लिक स्कूल आदि संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को बुलाया गया था। विद्यालयों में प्रोजेक्टर एवं टीवी के माध्यम से चंद्रयान-3 की लैंडिंग को दिखाया गया। विद्यालय में पहुंचे छात्र तिरंगा लेकर बैठे थे। विद्यालय के अध्यापकों ने चंद्रयान की बारीकियों एवं बच्चों की आशंकाओं को शांत किया और उसके महत्व को बताया। जैसे ही चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग हुई। उत्साह से लबरेज छात्र-छात्राएं भारत माता की जय के नारे लगाने लगे। विद्यालय की ओर से मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया गया।
औड़िहार संवाददाता के अनुसार संगत आश्रम, बूढ़ेनाथ महादेव मंदिर, रामघाट मंदिर, सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षकों और स्वयंसेवी संगठनों से जुड़े लोगों ने दर्शन-पूजन कर इसकी कामयाबी के लिए शीश नवाया। वेद इंटरनेशनल स्कूल, जीबी इंटरनेशनल स्कूल, आरजेपी स्कूल में प्रार्थना सभा की गई।भीमापार संवाददाता के अनुसार शासन के निर्देश के अनुपालन में क्षेत्र के सरकारी और मान्यता प्राप्त विद्यालय चंद्रमा पर चंद्रयान के उतरने का सजीव प्रसारण देखने के लिए शाम को पांच से 6:30 बजे तक खुले रहे।
शिक्षकों ने बच्चों को यह नजारा दिखाने की तैयारी के साथ इसके महत्व पर प्रकाश डाला। मरदह संवाददाता के अनुसार खंड शिक्षाधिकारी राजीव यादव एवं एआरपी राजीव सिंह के साथ कंपोजिट विद्यालय मरदह के छात्र-छात्राओं ने ब्लाक संसाधन केंद्र के सभागार में चंद्रयान की लैंडिंग देखी। इस मौके पर सत्यवती मौर्य, पुष्पा चतुर्वेदी, रानी दुबे, उपेंद्र कुमार, रजनी सिंह, माया सिंह, रविंद्र मौर्य, अंजली कनौजिया, राजेश भारती, अनामिका गुप्ता, दुर्गेश गुप्ता, अरुण सिंह, वसुंधरा यादव आदि मौजूद थीं। मौधा संवाददाता के अनुसार इस मौके पर अश्विनी पांडेय, आदित्य विक्रम सिंह, पवन पांडेय, विनय पांडेय आदि मौजूद थे।
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भारत के लिए ऐतिहासिक चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर उतरने का इंतजार बच्चों को सुबह से ही रहा। कई जिज्ञासु बच्चे इसको लेकर सुबह से ही प्रश्न पूछते रहे। चार बजते ही बहुत से बच्चे चंद्रयान का नजारा देखने के लिए स्कूल पहुंचे। प्रज्ञा, शिक्षिका सैदपुर 0000
चंद्रयान को चंद्रमा पर उतारने का वैज्ञानिक प्रयत्न देखने के लिए हम छात्र पिछले दो दिन से उत्सुक हैं। अपने देश के लिए इस गौरव के पल को देखने के लिए सब काम छोड़कर हमने इसका सजीव प्रसारण देखा।- शौर्य पांडेय, आरजेपी स्कूल सैदपुर
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चंद्रमा पर पहुंचने की कल्पना को साकार करने का यहां के वैज्ञानिकों का प्रयत्न सराहनीय है।- राहुल चौहान, शिक्षार्थी एसओएस स्कूल सैदपुर 0000
आज वैज्ञानिकों ने जो कीर्तिमान स्थापित किया है उससे पूरा देश उत्साह से लबरेज है।- प्रेयश पांडेय, वेद इंटरनेशनल स्कूल
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चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से देशवासियों का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है। विश्व में भारत के वैज्ञानिकों ने अपना लोहा मानवा लिया।-
दीपक कुमार सिंह, एसएस देव पब्लिक स्कूल‚ हेतिमपुर 0000
यह मेरे जीवन का पहला अनुभव है। जब मैंने प्रोजेक्टर पर चंद्रयान को उतरते देखा। मेरी भी इच्छा है कि मैं भी देश के लिए कुछ करूं।- रिशू यादव, ब्लॉसम एकेडमी स्कूल जीवपुर
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रूस का यान क्रैश हो गया। इसके बाद भारत के चंद्रयान पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई थी। भारत के वैज्ञानिकों ने सफल लैंडिंग कराकर एक बार फिर साबित कर दिया कि यह संपेरों का नहीं‚ वैज्ञानिकों का देश है।- काजल यादव, बुद्धम् शरणम् महाविद्यालय लोदीपुर 0000
विज्ञान के अध्यापक ने इस दौरान चंद्रयान की बारीकियों को बताया। जिससे बहुत सी नई जानकारी मिली। यह पल उत्साह से भरा हुआ है।- गीता मौर्य, सत्यम इंटरनेशनल स्कूल लोदीपुर 0000
गौरव का क्षण है‚ मुझे ऐसा पहली बार एहसास हुआ कि हमारे देश की क्षमता विश्व की सोच से परे है। जो लोग सोचते हैं हम वो कर सकते हैं।- अमन सिंह, सेंट्रल पब्लिक स्कूल0000
वैज्ञानिकों ने चंद्रयान को चांद पर उतारकर भारत का मान पूरे विश्व में बढ़ाया है। चंदा, कंपोजिट विद्यालय जगदीशपुर (फोटो भी)
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फोटो... चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग पर वैज्ञानिक कमलेश शर्मा के गांव मना जश्न
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवतीपुर। इसरो में वैज्ञानिक कमलेश शर्मा के पैतृक गांव रेवतीपुर सहित पूरे इलाके में बुधवार की शाम चंद्रयान-3 की चांद के सतह पर सफल लैंडिंग होने पर जश्न का माहौल है। सुबह से ही लोग जगह-जगह हवन पूजन, वैज्ञानिक की फोटो लेकर इसके सफल लैंडिंग की कामना कर रहे थे। वहीं चांद के सतह पर सफल लैंडिंग होने पर एक दूसरे को बधाई देकर जश्न मनाया।
वैज्ञानिक कमलेश शर्मा इस मिशन के अन्य वैज्ञानिकों की टीम के साथ जुड़े हैं। इसके पहले 2014 में मिशन मंगलयान में चीफ कंट्रोलर की भूमिका निभा चुके हैं। जबकि कुछ वर्ष पहले मिशन चंद्रयान- 2 के लांचिंग टीम में भी रह गांव और जिले का नाम रोशन कर चुके हैं। लोगों ने कहा कि चांद के दक्षिणी ध्रुवपर आज तक कोई नहीं पहुंच सका है। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से भारत विश्व का इकलौता देश बन गया है।
15 सितंबर 1986 को जन्मे कमलेश कुमार शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा गांव पर जबकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट तक की शिक्षा गाजीपुर जिले से ही हुई। इसके बाद पिता वेदप्रकाश शर्मा और माता श्रीकांती से दूर रह शुरू से ही वैज्ञानिक बनने की इच्छा पाले कमलेश शर्मा ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और गणित में पोस्ट ग्रेजुएशन किए। वर्ष 2008 में परास्नातक में लखनऊ विश्वविद्यालय के इतिहास में सर्वाधिक अंक प्राप्त करके रिकार्ड 10 गोल्ड मेडल प्राप्त किए।
इसी दौरान नेट और गेट की परीक्षा भी पास की। वर्ष 2010 में मैथमैटिक्स एक्सपर्ट का इसरो ने एक स्पेशल रिक्रूटमेंट किया। इसमें पूरे देश से 12 लोगों का चयन हुआ। इसमें कमलेश भी शामिल थे। इसी के बाद उन्होंने 12 अप्रैल 2010 को इसरो ज्वाइन किया था। वैज्ञानिक कमलेश शर्मा ने देश के लिए अनेक सैटेलाइट लांचिंग मिशन में भाग लिया। इनमें मार्स आर्बिटर मिशन (मंगलयान), कार्टोसैट-1, ओशनसैट-2, हैमसैट, कार्टोसैट-2ए, इंडिया और फ्रांस के ज्वाइंट वेंचर सेटेलाइट, मेघा ट्रोपिक-1 सेटेलाइट के सफल प्रक्षेपण अहम भूमिका रही है।