संवाद न्यूज एजेंसी
नंदगंज। स्थानीय गांव बरहपुर में बुधवार की देर शाम चक्रवर्ती सम्राट अशोक मौर्य की जयंती केक काट कर मनाई गई। इससे पहले अशोक स्तंभ के समक्ष दीप, धूप और पुष्प अर्पण कर बुद्धधम्म और वंदना की गई।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि महान चक्रवर्ती सम्राट अशोक एक सम्राट ही नहीं बल्कि सम्राटों के सम्राट थे। उन्होंने अपने जीवन काल में कई राज्यों को जीतकर मौर्य राज्य का विस्तार किया। मौर्य काल का भारत अफगानिस्तान तक था। सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में 20 महाविद्यालय स्थापित कर शिक्षा को भी बढ़ावा देने का काम किया था।
कलिंग युद्ध के नरसंहार को देखकर उनका हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया। भारत सरकार ने तो अशोक स्तंभ को राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में तो अपनाया लेकिन सम्राट अशोक के जन्मदिन को भूल गये। प्रदेश सरकार और भारत सरकार को अन्य महान विभूतियों के जन्मदिन के अनुसार सम्राट अशोक के जन्म उत्सव को भी धूमधाम से मनाएं और सार्वजनिक अवकाश घोषित करें। कहा कि राजनीतिक भागीदारी के बिना कुशवाहा समाज के लोगों का आर्थिक और सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं हो सकती।
कुशवाहा समाज की सूरत बदलने के लिए हमें आपसी समरसता के साथ एकजुटता लानी होगी। सम्राट अशोक मौर्य और बाबा भीमराव अंबेडकर के जीवन काल को विस्तार से बताते हुए उनके पद चिन्हों पर चलने का आह्वान किया। कहा कि मौर्य समाज का अपना गौरवशाली इतिहास नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने समाज के विकास के लिए शिक्षा को जरूरी बताते हुए कहा कि बिना शिक्षा ग्रहण किए समाज देश का विकास नहीं हो सकता है।
अपने गौरवशाली इतिहास का एहसास करने के लिए समाज के लोगों से अपने घर में सम्राट अशोक की फोटो लगाने की गुजारिश की। इस मौके पर भरत कुशवाहा, नगीना कुशवाहा, सूबेदार कुशवाहा, संजय कुशवाहा, मुसाफिर कुशवाहा, अमित, अरविंद कुशवाहा, बादल मौर्य, अभिषेक हरदेव कुशवाहा, राजकुमार, राकेश मौर्य, नित्यानंद कुशवाहा, बंटी , जयकेश कुशवाहा, पुनीत, विपिन श्रीकांत, दुर्वासा कुशवाहा, सुबेदार कुशवाहा, माखन कुशवाहा आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता रिटायर्ड एडीओ एग्रीकल्चर रामनरेश कुशवाहा और संचालन अजय कुशवाहा ने किया।