संवाद न्यूज एजेंसी
बारा। अल्लाह से प्यार और इबादत की कोई उम्र नहीं होती। माह- ए- रमजान की शुरुआत होते ही इबादतों का सिलसिला शुरू हो गया है। वैसे तो इस्लाम में 12 साल से अधिक उम्र होने पर ही रोजा रखने की बात कही गई है, लेकिन दीन से मुहब्बत के चलते इससे कम उम्र के बच्चे भी रोजा रखकर अल्लाह को राजी करने में जुटे हैं। बृहस्पतिवार को बारा के नन्हें रोजेदार अहसन नदीम, अजवद नदीम और मारिया ने अल्लाह से मुल्क की तरक्की, अमन - चैन और हिफाजत की दुआ मांगी।
बृहस्पतिवार को रमजान - उल - मुबारक का सातवां रोजा रखा गया। बारा गांव के मुहल्ला कोट निवासी आसिम नदीम की बेटी मारिया ने पांच रोजा मात्र सात साल की उम्र में रखा। पुत्र अहसन नदीम 10 साल की उम्र में तो अजवद नदीम (8 ) की उम्र में रोजा रखकर कुरआन की तिलावत भी कर रहे हैं। इतनी कम उम्र में ही दोनों भाइयों ने रमजान के पूरे रोजे रखने का फैसला किया है। तीनों भाई और बहन रोजा रखने के साथ ही कुरआन की तिलावत भी कर रहे हैं। अल्लाह से दुआ कर रहे हैं कि अपने मम्मी - पापा के सपनों को हम साकार कर सकें। नन्हें रोजेदारों को शाम होते ही घर वाले इफ्तारी के समय तोहफे देकर खुश भी कर रहे हैं।