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तीसरी आंख की नजर में होंगे जिला कारागार के बैरक

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गाजीपुर। जिला जेल की सुरक्षा को और दुरुस्त करने के लिए यहां छह सीसीटीवी कैमरे और लगाए जाएंगे। जेल प्रशासन ने इसके लिए डीआईजी जेल एवं शासन को प्रस्ताव भेजा है। पूर्व में जिला जज, जिलाधिकारी एवं पुलिस कप्तान द्वारा किए गए जेल निरीक्षण में बचे हुए बैरकों में तत्काल सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्देश दिया था। लेकिन अभी तक यह व्यवस्था दुरूस्त नहीं हो सकी है। जबकि आला अधिकारियों ने सीसीटीवी कैमरों को अपग्रेड करने और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए एक सप्ताह के अंदर प्रस्ताव भेजने को कहा था। ऐसे में जेल के बैरक तीसरी आंख की नजर में होंगे। जिला जेल में सीसीटीवी कैमरा लगाने को लेकर कई बार कैदी उत्पात मचा चुके हैं। एक साल पहले भी कैदियों ने जेल के भीतर तोड़फोड़ एवं सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही केबल को नोच दिया था। तब से लेकर अब तक कई बैरकों में जेल प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया था। मुख्य गेट से लेकर अंदर तक लगे कुल 30 सीसीटीवी कैमरों में कुछ ही काम करते हैं। इनमें भी आधे में तकनीकी खराबी आ गई है। अभी जेल में सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी सुधार की जरूरत है। इन दिनों जेल में कुद बंदियों की संख्या 936 है। इनमें 34 महिलाएं शामिल हैं। जेल अब भी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। यहां बंदी रक्षकों की संख्या मानक के आधा है। डिप्टी जेलर की भी कमी है। यहां कैदियों से मिलने आने वाले मुलाकातियों का ब्योरा दर्ज किया जाता है। लेकिन कई बार ऐसा हुआ है कि बिना नाम-पता दर्ज किए केवल मुहर लगाकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। जेल प्रशासन का दावा है कि बंदियों के स्वास्थ्य के लिए पूरी सर्तकता बरती जाती है। महिला बंदियों के साथ रह रहे छोटे बच्चों का अच्छे तरीके से रखरखाव भी किया जाता है। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जेल में ठंड के समय से सालों पुराने और कटे-फटे कंबल दिए जाते हैं। बाहर से आने वाले बंदियों को खुद अपना कंबल और चदर मंगाना पड़ता है। जेल अधीक्षक राजेंद्र ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर जेल में छह और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे पहले 30 कैमरे लगे थे। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
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