ताड़ीघाट रजवाहा में नाम मात्र का पानी - संवाद
रबी की फसल के तहत वर्तमान में गेहूं की सिंचाई के लिए पानी की सख्त जरूरत है। जिले में अधिकांश किसान सिंचाई के लिए नहरों पर निर्भर हैं। लेकिन, नहरों में डेढ़ से दो फीट तक ही पानी है। टेल तक पानी नहीं पहुंच पाने के कारण गेहूं की सिंचाई बाधित हो रही है। इसके कारण किसान मायूस नजर आ रहे हैं। जनपद में एक लाख 69 हजार 278 हेक्टेयर में गेहूं की खेती हुई है।
जिले में साढ़े पांच लाख किसान हैं। जनपद में नहरों की कुल लंबाई लगभग 1490 किलोमीटर है, जो जिले के कृषि योग्य क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराती हैं। इन नहरों से 47,267 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई होती है। वर्तमान में गेहूं की फसल को सिंचाई की जरूरत है। लेकिन, प्रचंड गर्मी शुरू होने से पहले ही नहरों के पानी का स्तर खिसक गया है। इससे किसान परेशान व मायूस हैं। जनपद में अधिकांश किसान आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वह फसलों की सिंचाई के लिए नहरों के ऊपर निर्भर हैं। निजी व किराये के संसाधनों का इस्तेमाल करने में जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में किसानों के लिए नहरें जरूरत व मजबूरी दोनों हैं। नहरों में नाम मात्र का पानी होने के कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में मौजूदा समय में गेहूं की सिंचाई का कार्य बाधित हो रहा है। इससे किसान मायूस हैं। दूसरी तरफ सिंचाई विभाग बेपरवाह बना हुआ है।
केस नंबर एक - रमवल के पास ताड़ीघाट रजवाहा में महज एक से डेढ़ फीट तक पानी है। ताड़ीघाट के आदर्श सिंह, रमवल के सोनू यादव व सुहवल के रामजन्म राय ने बताया कि इस रजवाहे में हर जगह पानी का स्तर यही है। इसके कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
केस नंबर दो - जहूराबाद नहर करीब 20 किलोमीटर लंबी है। जहूराबाद नहर में भी पानी का स्तर बहुत कम है। इस नहर से कईटोला, कुरथौरा, तिलकपुर, मुस्तफाबाद, लोहवा, बरेसर, सलेमपुर, डेरा मलिकपुरा आदि गांवों में सिंचाई होती है। रामप्रकाश यादव, हरेंद्र यादव, संतलाल कुमार आदि किसानों ने बताया कि नहर में पानी कम होने के कारण सिंचाई में दिक्कत हो रही है।
गेहूं की फसल को सिंचाई की जरूरत है। टेल तक पानी न पहुंचने से किसानों को किराये और निजी संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। संबंधित अधिकारी को नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया है। - सिमंत अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग।