गाजीपुर। पीजी कॉलेज के बीएससी (कृषि) सप्तम सेमेस्टर के छात्रों के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव के अंतर्गत फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर सेमिनार का आयोजन सुखवीर एग्रो इनर्जी लिमिटेड में किया गया।
इस मौके पर कंपनी के प्रबंधक प्रिंस गक्खर ने कहा कि पराली जलाने की परंपरा अब हमारे पर्यावरण और कृषि भूमि के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। कंपनी किसानों के साथ मिलकर इस चुनौती का समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में पीजी कॉलेज के डॉ. जी सिंह ने हैप्पी सीडर और सुपर स्ट्रॉ प्रबंधन प्रणाली, बायोएंजाइम्स, कम्पोस्टिंग तकनीक और बायोचार निर्माण जैसे नवाचारों के बारे में विस्तार से बताया।
कंपनी के एचआर हिमांक यादव ने पराली के वैकल्पिक प्रबंधन विधियों की व्यवहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फसल अवशेषों धान की भूसी, पराली, सरसों की तूड़ी, गन्ने की पत्तियों, गन्ने की खोई को ईंधन के रूप में प्रयोग करके स्टीम तैयार की जाती है।
इसका उपयोग टरबाइन के द्वारा बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है जो बहुत ही सस्ती तकनीक है। स्थानीय किसान प्रतिनिधि छोटेलाल ने पराली से जैविक खाद बनाने के अपने सफल अनुभव साझा किए।
महिपाल सिंह भोज ने छात्रों को पराली प्रबंधन से जुड़ी सरकारी योजनाओं, उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी और तकनीकी प्रशिक्षण की जानकारी दी। सेमिनार के समापन पर उपस्थित छात्र-छात्राओं ने पराली न जलाने की शपथ ली।
कार्यक्रम में डॉ. शिवशंकर सिंह यादव, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. सुधीर कुमार सिंह, डॉ. पीयूषकांत सिंह, विपुल उपाध्याय, डीके शर्मा, दिनेश यादव आदि उपस्थित थे।