भांवरकोल थाने के कुंडेसर चट्टी पर 1991 में हुए तिहरे हत्याकांड के मामले में बुधवार को साक्ष्य के लिए आरोपी बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह की पेशी हुई। कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेश किया गया लेकिन साक्ष्य की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने साक्ष्य के लिए अगली तारीख आठ जनवरी तय की है।
कु़ंडेसर चट्टी पर दो मई 1991 की रात विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी अफजाल अंसारी की प्रचार जीप पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। इस हमले में जीप पर सवार सुरेंद्र राय और कमला सिंह के अलावे चट्टे पर सड़क के किनारे सो रहे दूकानदार झिंगूरी साह की मौत हो गई थी।
हमले में दीनानाथ राय, रामेश्वर और जगन्नाथ घायल हो गए थे। इस मामले में मुकदमे के जगन्नाथ सिंह और अन्य गवाहों की गवाही कुछ वर्ष पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हो चुकी है। मामले की अंतिम सुनवाई से पहले वादी पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर की गई।
उच्च न्यायालय ने 19 नवंबर 2015 को आदेश दिया कि आरोपियों की उपस्थिति में वादी मुकदमा जगन्नाथ सिंह का साक्ष्य अंकित किया जाए। उसके बाद स्थानीय अदालत ने गवाहों को तलब किया। साथ ही आरोपी बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह को भी अदालत ने तलब किया गया। पंचायत चुनाव के चलते पिछली तिथि पर्याप्त सुरक्षा के अभाव में आरोपियों को पेश नहीं किया जा सका था।
बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच पीलीभीत जेल से आरोपी त्रिभुवन सिंह और सेंट्रल जेल वाराणसी से बृजेश सिंह को लाकर अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट रूपेश रंजन की अदालत में पेश किया गया। गवाह जगन्नाथ सिंह न्यायालय में उपस्थित थे।
आरोपियों ने न्यायालय में साक्ष्य स्थगित करने का प्रार्थनापत्र दिया। उनका कहना था कि मामले को गैर जनपद में स्थानांतरित करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है और उच्चतम न्यायालय में भी एक प्रार्थनापत्र दिया गया है।
न्यायालय ने उनके तर्कों को खारिज करते हुए साक्ष्य की कार्यवाही पूरी करने का आदेश दिया। मगर आरोपियों ने पत्रावली को अन्य कोर्ट में स्थानांतरित करने का प्रार्थनापत्र जिला जज को दिया और सुनवाई की अगली तारीख 8 जनवरी तय कर दी गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर अंतिम बार मौका देने की मांग की।
गवाह ने जान का खतरा बताया : कुंडेसर चट्टी हत्याकांड के वादी जगन्नाथ सिंह ने अदालत प्रार्थनापत्र देकर सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने बताया कि उनकी जान को खतरा बना हुआ है। ऐसे में उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जानी चाहिए। अदालत ने थानाध्यक्ष भांवरकोल को आदेशित किया कि साक्ष्य के लिए तय तिथि 8 जनवरी 2016 को सुरक्षा व्यवस्था में गवाह का बयान दर्ज कराना सुनिश्चित कराएं।