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रविवार को वीरता पुरस्कार मिला, मंगलवार को शहीद

Wed, 28 Jan 2015 12:23 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
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देश के 66वें गणतंत्र दिवस पर युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित हुए 48 घंटे भी नहीं बीते थे कि कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में जिले के डेढ़गांवा निवासी और 9 गोरखा राइफल्स के कमांडिंग आफिसर कर्नल मुनींद्र नाथ राय मंगलवार की सुबह शहीद हो गए।
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करीब घंटे भर चली इस मुठभेड़ में अदम्य साहस का परिचय देते हुए उन्होंने अपने साथी के साथ मिलकर दो आतंकियों को भी मार गिराया। देर शाम उनकी शहादत की खबर जब गाजीपुर पहुंची तो हर किसी की आंखें नम हो गईं।

मुठभेड़ में शहीद हुए कर्नल और पुलिस के सिपाही की मौत पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विट कर शोक प्रकट किया और पीडि़त परिवारों से सांत्वना भी जताई। मारे गए आतंकियाें की शिनाख्त आदिल खान और शिराज डार के रूप में की गई है। मुठभेड़ स्थल से जवानों ने असलहा और बारूद भी बरामद किया है।
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डेढ़गांवा निवासी नागेंद्र नाथ राय के पुत्र कर्नल मुनींद्र नाथ राय (36 वर्ष) कश्मीर में 9 गोरखा राइफल्स में कमांडिंग आफिसर थे।

उनकी बहादुरी पर देश के 66वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें युद्ध सेवा मेडल से नवाजा था, मगर उन्हें सम्मानित हुए 48 घंटे भी नहीं बीते थे कि मंगलवार की सुबह हिजबुल आतंकी आदिल खान के पुलवामा के त्राल इलाके के मिंदोरा गांव स्थित अपने घर पर आने की सूचना मिली।

यह जानकारी भी मिली थी कि उसके साथ एक अन्य आतंकी है। इस पर सेना की राष्ट्रीय राइफल और पुलिस की ओर से आतंकियों के खिलाफ आपरेशन चलाया गया। जवानों द्वारा इलाके की घेराबंदी करने से बौखलाए आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। मुठभेड़ में सेना के कर्नल मुनींद्र नाथ राय और पुलिस का एक सिपाही शहीद हो गया।

सुरक्षा बलाें ने दोनों आतंकियों को भी ढेर कर दिया। मुनींद्र के माता-पिता शहर की चंदन नगर स्थित कालोनी में रहते हैं, जबकि उनकी पत्नी प्रियंका राय बच्चों के साथ दिल्ली में रहती हैं। शहीद मुनींद्र नाथ तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके दो र्भाई डीएन राय और वाईएन राय भी सेना में कर्नल हैं।

गाजीपुर के लाल की शहादत को सलाम
शहीद मुनींद्र नाथ राय के माता-पिता को सदमा न पहुंचे, इसलिए लोगों ने मंगलवार की देर शाम तक उन्हें बेटे के शहीद होने की जानकारी नहीं दी थी। उन्हें सिर्फ इतना बताया गया था कि उनका बेटा आतंकवादियों के हमले में घायल हो गया है।

बेटे के देश के लिए शहीद होने की जानकारी से अनभिज्ञ माता-पिता ईश्वर से अपने लाल के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करने लगे, मगर देर रात जैसे ही उन्हें यह पता चला कि उनका लाल देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया है, उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी।

यह दृश्य देख वहां मौजूद अन्य लोगों की भी आंखें छलछला उठीं। उधर, मुनींद्र के पैतृक गांव डेढ़गांवा के लोगों में भी शोक की लहर दौड़ गई। कुछ घंटे पहले जिस गांव के लोग अपने लाल की बहादुरी पर फूले नहीं समा रहे थे, वे ही मुठभेड़ में उनके शहीद होने की खबर मिलते ही गम के सागर में डूब गए लेकिन सभी ने उनकी शहादत को सलाम भी किया।
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