भांवरकोल। शेरपुर पंचायत में आयोजित नौ दिवसीय रुद्र महायज्ञ के सातवें दिन बृहस्पतिवार को बाल ब्रह्मचारी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत में सनातन शब्द का जिक्र मिलता है। भागवत में विष्णु के लीलावतारों का वर्णन है। इसमें भक्तियोग और वैराग्य का भी उल्लेख मिलता है। गीता के अनुसार वैदिक साहित्य का पांचवां अध्याय ईश्वर है और वही सनातन है। आत्मा को भी सनातन माना गया है। ईश्वर और जीव दोनों ही सनातन हैं।
उन्होंने कहा कि सनातन आत्मा का सनातन ईश्वर की सेवा ही सनातन धर्म कहलाएगा। ईश्वर, मोक्ष एवं आत्मा को तत्व और ध्यान से जाना जा सकता है। इसका मूल सार पूजा, जप-तप, दान, सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा और यम-नियम हैं। सनातन धर्म को हिंदू और वैदिक धर्म के नाम से भी जाना जाता है। सनातन धर्म सबसे पुराना धार्मिक दर्शनशास्त्र है। यह मूल्यों, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का वर्णन करता है, जो ब्रह्मांड के निर्माता ने प्रतिस्थापित की है। इनका पालन सभी को करना है। सनातन धर्म के शास्त्र वेद विश्व के सबसे पुराने लिखित ग्रंथ हैं, जो कम से कम 7500 ईसा पूर्व के हैं। धर्म शब्द का उल्लेख ऋग्वेद में है, जो सृजित प्राणियों खासतौर पर ब्रह्मांडीय के लिए उपयोग किया गया था कि उन्हें निर्धारित पद्धति के अनुसार ही चलना है।