गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ब्लड जांच व रिपोर्ट सर्वर पर निर्भर है। पर्ची पर बिना बार कोड के खून का सैंपल भी नहीं लिया जा रहा है।
कभी प्रक्रिया धीमी तो कभी ठप होने से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी गंभीर मरीजों को तब होती है जब जांच न होने से उनका उपचार शुरू नहीं हो पाता है। नियत दिन पर जांच रिपोर्ट न मिल पाने की स्थिति में मरीजों को पांच से छह घंटे का इंतजार कर वापस होना पड़ रहा है।
ओपीडी पर्ची से लेकर जांच तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होने से मरीजों को प्रतिदिन दिक्कत उठानी पड़ रही है। ओपीडी का संचालन नवनिर्मित 300 बेड के अस्पताल में होता है। जबकि ब्लड संबंधित जांच प्रक्रिया के लिए 200 बेड के पुरुष अस्पताल तक जाना पड़ता है। वहां स्थापित काउंटर पर ओपीडी पर्ची पर सबसे पहले बार कोड लगाना पड़ता है। देखते ही देखते काउंटर पर भीड़ लग जाने से घंटों बार कोड लगवाने के लिए इंतजार करना पड़ता है। वहां से बार कोड लगवाने के बाद ब्लड सैंपल के लिए ट्यूब लेने के लिए दूसरे काउंटर पर इंतजार करना पड़ता है।
इसके बाद ब्लड सैंपल निकलवाने के लिए भी मरीजों को जूझना पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो से तीन घंटे लग जाते हैं, ऐसे में जांच रिपोर्ट नियत तिथि पर न मिलने की स्थिति में मरीजों एवं तीमारदारों को बिना दवा के घर वापस लौटना पड़ता है। खासकर दूर-दराज इलाकों से आए लोगों को आवागन में जहां आर्थिक दंश झेलना पड़ता है, वहीं परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने बताया कि मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए काउंटर की संख्या बढ़ाने की तैयारी चल रही है। जल्द ही इस समस्या से निजात दिलाई जाएगी।