फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghazipur News: धधकती कोयला भट्टियां घोल रहीं जीवन में जहर, घुट रहा दम

विज्ञापन
सदर कोतवाली स्थित कोयले की भट्ठी। संवाद
विज्ञापन
गाजीपुर। शहर के कोतवाली क्षेत्र स्थित बिंदवलिया, सुखदेवपुर और गंगा तट से सटे कई इलाकों में अवैध रूप से चल रहीं लकड़ी की कोयला भट्ठियां स्थानीय लोगों की सांसों में जहर घोल रही हैं। प्रशासन की आंख के नीचे 10 से अधिक भट्ठियां दिन-रात जहरीला धुआं उगल रही हैं। अवैध कोयला तैयार होकर ट्रांसपोर्ट भी हो रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदारों की चुप्पी से कई सवाल उठ रहे हैं। उधर इससे प्रभावित लोगों का कहना है कि आंखों में जलन, सांस में तकलीफ तो आम बात हो गई है। धुएं से पूरा इलाका जहरीला हो रहा है। पड़ताल में सामने आया कि 80-100 क्विंटल गीली लकड़ी झोंककर प्रत्येक भट्ठी से 50-60 क्विंटल कोयला तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी होने में एक सप्ताह लग जाता है। भट्ठी के निकलने वाला धुआं और कालिख से ग्रामीणों की सेहत भी बिगड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों को सब कुछ पता होते हुए भी कार्रवाई नहीं की जाती। जिले में अवैध कोयला भट्टियां पर्यावरण, स्वास्थ्य और वन संरक्षण तीनों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। हर दिन निकलने वाला धुआं लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है, जबकि हरे पेड़ों की कटाई से वन क्षेत्र लगातार उजड़ रहा है।
विज्ञापन

ऐसे बनता है लकड़ी का कोयला -एक भट्ठी संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 2-4 फीट गहरा और लंबा गड्ढा खोदा जाता है। उसमें गीली लकड़ियां जमाकर भरी जाती हैं। नीचे अंगारे रखकर ऊपर लोहे के पत्तर व मिट्टी से ढंका जाता है। 3–5 दिन तक कम ऑक्सीजन में लकड़ी जलकर कोयले में बदल जाती है। इस प्रक्रिया में 7 दिन लगता है। इससे निकलने वाला धुआं अत्यधिक हानिकारक होता है।
हवा में घुलते जहर से मरीजों में बढ़ रहीं सांस की बीमारियां-मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के चिकित्सक डॉ. नारायन पांडेय का कहना है कि यह धुआं फेफड़ों में पहुंचकर उन्हें कमजोर कर देता है। ठंड के मौसम में बुजुर्ग और बच्चों के लिए यह खासतौर पर घातक है।
विज्ञापन

अवैध कटाई का खुला खेल : जिले में न सिर्फ सूखी लकड़ियां, बल्कि नमी वाली हरी लकड़ियां भी काटी जा रही हैं। कोयला बनाने में गीली लकड़ी ज्यादा उपयोगी बताई जाती हैं। कोयले की भट्टियों के साथ ईंट भट्टियों का धुआं भी हवा में जहर घोल रहा है। इसके चलते अवैध रूप से पेड़ों की कटाई भी तेज हुई है।
गीली लकड़ी और गोबर के कंडे जलाकर सात-सात दिन लगातार भट्ठियां जलती हैं। इतने धुएं में रहना मुश्किल है। बच्चे बीमार पड़ते हैं। -पंकज यादव।

दिन-रात उठने वाला धुआं आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी करता है। बच्चे खांसी से परेशान रहते हैं। -इकबाल।

आंखों में जलन, सांस में तकलीफ आम बात हो गई है। भट्ठियों और ईंट भट्ठों का धुआं पूरा इलाका जहरीला कर रहा है।-अनिल यादव।

हर कोई देख रहा है कि कैसे हरे पेड़ की लकड़ियां काटी जा रही हैं। लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों में होती है। अलग-अलग जिलों तक ट्रकों में कोयला जा रहा है। -संजय राजभर।
अवैध तरीके से कोयला भट्ठियों के संचालन की जांच के लिए टीम गठित कर जल्द ही संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -अविनाश कुमार, जिलाधिकारी।

जिले में सिर्फ पांच कोयला भट्ठियों के लाइसेंस जारी किए गए थे और किसी का नवीनीकरण नहीं हुआ। इनमें से किसी का संचालन हो रहा है तो वह अवैध है।-अजीत प्रताप सिंह, डीएफओ, वन विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें