फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghazipur News: सादे पर्ची का काला कारनामा, निजी मेडिकल स्टोर से ही दवा लेकर है आना

विज्ञापन
विज्ञापन
सरकारी अस्पताल में बाहर की दवा मरीज के पर्चे पर लिखने को लेकर मनाही के बाद भी चिकित्सक मान नहीं रहे। प्रतिदिन सादे पर्ची पर मरीजों के लिए वह दवाएं ही लिखी जाती हैं जो निजी मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं। आपातकालीन कक्ष, ओपीडी और वार्ड में इन दिनों एंटीबायोटिक और इंजेक्शन को लेकर बड़े पैमाने पर यह हो रहा है।
विज्ञापन

बेहतर नि:शुल्क चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के दावे को स्वास्थ्य कर्मी फेल कर रहे। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में जैसे ही तीमारदार गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज को लेकर पहुंचता है, वहां तैनात डॉक्टर, फॉर्मासिस्ट और स्वास्थ्यकर्मी स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सादे पर्ची पर इंजेक्शन और एंटीबायोटिक लिख देते हैं। यानी की उक्त दवा अस्पताल के बाहर निजी मेडिकल स्टोर पर मिलेगी।
कई मरीजों ने बताया कि जब वे दवा लेकर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी के पास पहंुचते हैं तो सादे पर्ची को फाड़कर कूड़े दान में डाल दिया जाता है। दवा के रैपर पर निर्धारित मूल्य के हिस्से को काटकर जेब में रख लेते हैं। शिफ्ट बदलने के बाद बंद कमरे में सभी रैपर की गिनती कर निर्धारित मेडिकल स्टोर तक पहुंचा दिया जाता है, जहां से उन्हें कमीशन मिलता है। यह खेल यहीं तक सीमित नहीं हैं, वार्ड और ओपीडी में भी यहीं कार्य चलता है।
विज्ञापन

तीमारदार शिकायत करने से इसलिए डरते हैं कि इलाज में कहीं कोताही न बरती जाए। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जैसे ही मेडिकल कालेज के आला अधिकारियों की जांच की जानकारी मिलती है, स्वास्थ्यकर्मी तत्काल सभी पर्ची और रैपर को लेकर बाहर निकल जाते हैं। कमोवेश यह हाल यहीं का नहीं है, जनपद के सभी सरकारी अस्पतालों में इसतरह से काम हो रहा है।

000000
इनसेट
आपातकक्ष में उपलब्ध दवाइयों की किसी को नहीं है जानकारी
गाजीपुर। मेडिकल कालेज अस्पताल स्थित आपातकक्ष में कौन सी जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध है, इसकी जानकारी न तो चिकित्सक के पास है और न ही फार्मासिस्ट के पास। उनके द्वारा सीधे यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जा रहा है कि इसकी जानकारी अस्पताल के औषधि भंडार केंद्र में तैनात कर्मियों द्वारा दिया जाएगा।

0000000
केस नंबर- एक
शहर की एक महिला मरीज डेंगू बुखार से पीड़ित है और इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं। रात के समय वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सादे पर्ची पर दवा लिखकर मंगाई गई और सुबह होते ही रैपर पैसे में तब्दील होने के लिए निजी मेडिकल स्टोर संचालक के पास पहुंच गया।

000000
केस नंबर - दो
एक छात्रा को बेहोशी की हालत में लाया गया। डॉक्टर ने सादे पर्ची पर इंजेक्शन लिखकर बाहर से मंगाने के बाद उसका उपचार शुरू हो पाया। तब- तक छात्रा दर्द से कराहती ही रही।

0000
केस नंबर- तीन
एक वृद्ध मरीज बुखार से पीड़ित थे। स्थिति बिगड़ने पर तीमारदार उन्हें उपचार के लिए आपातकालीन कक्ष में लेकर पहुंचे। जहां तत्काल उपचार करने के बजाए एंटीबायोटिक इंजेक्शन लाने की पर्ची परिजनों को दे दी गई। दवा आने के बाद उनका उपचार शुरू हो पाया।


000000

मां को कई दिनों से बुखार आ रहा है। आपातकालीन कक्ष में पहुंचने के बाद डॉक्टर द्वार सादे पर्ची पर इंजेक्शन लिखकर बाहर निजी मेडिकल स्टोर पर भेज दिया गया। विवशता है कि दवा लानी पड़ेगी, नहीं तो मरीज का उपचार ही शुरू नहीं हो पाएगा।- अमन मिश्रा, तीमारदार।


000000
रिश्तेदार की एक महिला बीमार थी। उनके उपचार के लिए आया था। यहां की स्थिति तो काफी खराब है। अगर जेब में पैसा न रहे तो मरीज कराहते घंटों बेड पर पड़ा रहे। वार्ड की स्थितियां तो इससे भी बदत्तर हैं।- संजय यादव, तीमारदार


सादे पर्ची पर दवा लिखने के मामले में शुरूआती दिनों में कार्रवाई की गई थी। अगर ऐसा फिर हो रहा है तो जांच कराई जाएगी। सख्त कार्रवाई की जाएगी।- प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य, महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज, गाजीपुर।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें