काशी की तर्ज पर 450 वर्षों से लहुरी काशी में भी रामलीला का भावपूर्ण मंचन होता है। 10 अक्तूबर से शुरू हो रहा रामलीला कई मायने में खास होगा। पहली बार राम राज्याभिषेक के दिन लेजर लाइट शो के माध्यम से समुंद्र मंथन और काशी उत्पत्ति के भावपूर्ण दृश्य दिखाने की तैयारी की गई है। इसके लिए वाराणसी के एक लाइट एंड साउंड शो के मालिक से संपर्क किया गया है।
जनपद का सबसे प्राचीन रामलीला दस अक्तूबर से शुरु होगा। काशी की तर्ज पर होने वाला रामलीला इस बार खास भी होगा। 28 अक्तूबर की रात इस बार लेजर लाइट शो से समुद्र मंथन और काशी की उत्पत्ति का दृश्य दिया जाएगा। इसके लिए वाल्मिकी साउंड वाराणसी से संपर्क किया गया है, जो पांच घंटे तक हरिशंकरी में कार्यक्रम प्रस्तुति देंगे।
अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा तिवारी के मुताबिक शाम सात बजे से, राम चबूतरा पर परंपरागत ढंग से वंदे वाणी विनायकों, आदर्श रामलीला मंडल, रायबरेली के ख्यातिलब्ध कलाकारों द्वारा रामलीला के मंचन का शुभारंभ किया जाएगा। इस अति प्राचीन रामलीला मंचन का शुभारंभ धनुष मुकुट पूजन, नारद मोह लीला एवं रामजन्म के साथ मंचन एवं भव्य पूजन के साथ प्रारंभ होगा।
इस बार की रामलीला का मंचन रायबरेली से आए हुए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। 25 अक्तूबर की रात एक बजे ऐतिहासिक भरत मिलाप का मंचन होगा। अगले दिन में 11 बजे अयोध्या वापसी के दृश्य का चलित मंचन होगा। 27 को कलेक्टर घाट पर मां गंगा के पूजन का दृश्य दिखाया जाएगा। इस मौके पर दशाअवतार की झांकी भी मंचन होगा।
28 अक्तूबर को राम राज्याभिषेक का पूरे वैदिक रीति रिवाज से मंचन किया जाएगा इस अवसर पर पहली बार लेजर लाइट शो के माध्यम से समुंद्र मंथन और काशी उत्पत्ति के भावपूर्ण दृश्य दिखाने की तैयारी की गई है। इसके लिए वाराणसी के एक लाइट एंड साउंड शो के मालिक से संपर्क किया गया है।