गाजीपुर। सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की लेटलतीफी लोगों की परेशानी का सबब बन रही है। साथ ही सरकार के समय पर कार्यालय पहुंचने के आदेश की खुली अवहेलना भी हो रही। इतना ही नहीं तीन माह पहले विकास भवन में हाजिरी के लिए लगाई गई बायोमैट्रिक मशीन का भी कोई मतलब नहीं रह गया है। उधर, आने जाने की मनमर्जी पहले की तरह ही जारी है। जबकि इधर फरियादियों को उनका इंतजार करना महंगा पड़ रहा है। शनिवार को अमर उजाला की टीम जब अल्पसंख्यक, बीएसए, मत्स्य एवं कृषि विभाग के कार्यालय पहुंची तो यहां कार्यालयों में कुर्सियां खाली मिली। सुबह 10:45 तक मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ही कार्यालय नहीं पहुंचे थे। बताया गया कि वह कमरे पर हैं कुछ देर बाद पहुंचेंगे। 10:15 बजे कृषि विभाग के आपरेटर अनुराग गुप्ता काम करने में व्यस्त थे। जबकि उनके सामने के कक्ष में अधिकांश लिपिकों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं। बमुश्किल तीन लिपिक ही काम करते दिखे। 10:20 बजे मत्स्य विभाग में तैनात लिपिक भी नहीं पहुंचे थे। कक्ष में एक महिला परिचारक वहां मौजूद थी। वहीं, मत्स्य अधिकारी फाइलें निबटा रहे थे।
सुबह 10:30 बजे बेसिक शिक्षा कार्यालय में मुश्किल से पांच से छह कर्मचारी मौजूद थे। जबकि अधिकांश लिपिकों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं। इसके ठीक सामने 10:40 बजे अल्पसंख्यक विभाग के सभी कर्मचारी नदारद थे। सवना गांव निवासी मनोज, कठवामोड़ के श्यामजी, रेवतीपुर के गोपाल, बारा के रामजीत ने बताया कि फरियादी तो दूर-दराज इलाके से आ जाते हैं, लेकिन कर्मचारियों एवं अधिकारियों के आने का कोई समय नहीं है। ऐसे में घंटों इंतजार करने के बाद ही इनसे मुलाकात हो पाती है। ऐसे में पैसा तो खर्च होता ही है समय की बर्बादी भी होती है।
कोट
कर्मचारियों को समय से आने का निर्देश है। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की जाएगी। समय-समय पर सरकारी कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया जाता है।
-श्रीप्रकाश गुप्ता, सीडीओ