भांवरकोल। बसंत पंचमी का पर्व बुधवार को मनाया जाएगा। इसको लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह है। बसंत पंचमी पर्व की पूर्व संध्या पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। सार्वजनिक रूप से मां सरस्वती की प्रतिमा को रखने वाली समितियां काफी दिनों से तैयारियों में जुटी थीं। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में मां सरस्वती की प्रतिमाओं को पंडालों में रख दिया गया है। बुधवार को विधि-विधान से पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार के बाद पट खोला जाएगा। माघ माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि बुधवार को बसंती पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। कुंडेशर के आचार्य हृदयनारायण दुबे ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से मां लक्ष्मी और देवी काली भी प्रसन्न होती हैं। इस दिन देवी सरस्वती का जन्म हुआ था।
मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती हाथों में पुस्तक, वीणा और माला लिए श्वेत कमल पर विराजमान होकर प्रकट हुई थीं। उन्होंने बताया कि इसलिए इस दिन मां सरस्वती की विषेश पूजा-अर्चना की जाती है। खास बात यह है कि बसंत पंचमी पर रवि योग भी रहेगा। यह योग स्वर्ण की खरीदी और नवीन प्रतिष्ठान के शुभारंभ के लिए विशेष माना गया है। बसंत पंचमी को अक्षया तृतीया की तरह शुभ माना जाता है। इस दिन को भी अबूझ मुहूर्त होता है। इस मुहूर्त में सभी तरह के मांगलिक कार्य एवं विवाह किए जा सकते हैं। शास्त्र के अनुसार बसंत पंचमी के पूरे दिन दोषरहित श्रेष्ठ योग रहता है। शास्त्रों के मुताबिक बसंत पंचमी के दिन ही भगवान शिव और पार्वती का तिलकोत्सव हुआ था और उनके विवाह की रस्में शुरू हुई थीं। इस दृष्टि से भी शादी के लिए बसंत पंचमी का दिन शुभ माना जाता है।