गाजीपुर। बकरीद जिसे ईदुल-अजहा भी कहा जाता है। मजहबे इस्लाम में यह दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। इसे लेकर शुक्रवार को मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में खरीदारी की खूब गहमागहमी रही। पशु मंडियों में विभिन्न प्रकार और नस्लों के जानवरों की खूब खरीद-फरोख्त हुई। सेवई और मेवों के साथ खोवा की मांग रही। घरों की साफ-सफाई की गई।
यह त्यौहार पैगंबर इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनके फरमाबरदार बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम से जुड़ा है। इन्हीं की सुन्नत अदा करने के लिए यह पर्व मनाया जाता है। बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार जामा मस्जिद के इमाम अब्दुल खालिक ने बताया कि कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांट कर एक हिस्सा गरीबों में और एक हिस्सा दोस्तों एवं रिश्तेदारों में बांटना चाहिए। गर्भवती जानवर की कुर्बानी को इस्लाम में गलत बताया गया है। कहा कि हर साहिबे-निसाब यानी जिन लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी है, उन पर कुर्बानी करना फर्ज है। जरूरी नहीं कि महंगे जानवर की ही कुर्बानी करें। हैसियत के मुताबिक सस्ता जानवर लेकर भी कुर्बानी की जा सकती है। कुर्बानी में दिखावा नहीं करना चाहिए बल्कि इसे अल्लाह की इबादत समझकर करना चाहिए।