गाजीपुर। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 65 फीसदी रसोइयों को अब तक आयुष्मान योजना का कार्ड बन सका है। जबकि अब ही 2322 रसोइयों का कार्ड अभी तक नहीं बन सका है।जिले में 1462 प्राथमिक, 454 कंपोजिट और 350 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इसके अलावा 237 विद्यालयों में अनुदानित उच्च प्राथमिक, राजकीय विद्यालय, माध्यमिक अनुदानित विद्यालय, अनुदानित मदरसा एवं केजीबीवी सहित कुल 2503 विद्यालयों में बच्चों के लिए दोपहर का पका-पकाया भोजन बनाने के लिए 6633 रसोइयों की तैनाती की गई है। इन विद्यालयों में तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों को रसोइया भोजन तैयार कर पका-पकाया खाना परोसती हैं। रसोइयों की मांग पर सरकार ने आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाकर उन्हें कैशलेस चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की सौगात दी थी। शासन के मार्च 2024 में जारी निर्देश के तहत आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधा से आच्छादित किया जाना था, लेकिन सितंबर 2025 तक जिले में 64.99 फीसदी यानी 4311 रसोइयों को इसका लाभ मिला है। 2322 यानी 35.01 फीसदी रसोइयों को अभी तक इसका लाभ नहीं मिल सका है। बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने इसे शत-प्रतिशत पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में रसोइयों का कार्ड बनाने का निर्देश दिया गया है।
छात्र संख्या पर होती है रसोइयों की तैनाती -गाजीपुर। प्रत्येक विद्यालय में 25 छात्र संख्या पर एक रसोइया, 26 से 100 पर दो, 101 से 200 छात्र पर तीन, 201 से 300 छात्र पर चार, 301 से 1000 पर पांच, 1001 से 1500 छात्र पर छह, 1500 से अधिक छात्र संख्या होने पर अधिकतम सात रसोइयों का चयन किया जाता है। मानदेय के रूप में शासन की ओर से उन्हें प्रतिमाह दो हजार रुपये मानदेय दिया जाता है।