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सम्मान का इंतजार: फांसी से काला पानी तक की सजा मिली... आजादी के बाद भी नहीं लग सकी क्रांतिकारी की प्रतिमा

Tue, 11 Aug 2026 01:39 PM IST
Pragati Chand डॉ. रामअवतार यादव, सादात (गाजीपुर)।

सार

Ghazipur News: देश को आजादी मिलने के बाद भी क्रांतिकारी जीतन पांडेय के सम्मान में बनवाई गई आदमकद प्रतिमा स्थापना का इंतजार कर रही है। लोगों का कहना है कि जीतन पांडेय को अब तक सम्मान नहीं मिलना इतिहास के साथ न्याय नहीं है।  
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जीतन पांडेय की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेने वाले क्षेत्र के हुरमुजपुर गांव के क्रांतिकारी जीतन पांडेय का बलिदान और संघर्ष आज भी सरकार की उपेक्षा का शिकार है। अंग्रेजों ने पहले उन्हें फांसी की सजा सुनाई, जिसे बाद में आजीवन कारावास और काला पानी में बदल दिया गया। देश को आजादी मिलने के बाद भी उनके सम्मान में बनवाई गई आदमकद प्रतिमा स्थापना का इंतजार कर रही है।

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जीतन पांडेय के पुत्र मिश्री पांडेय ने बताया कि हुरमुजपुर निवासी जीतन पांडेय को 20 जनवरी 1943 को अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया था। 24 जनवरी 1943 को जिला सेशन कोर्ट ने उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई, लेकिन बाद में सजा बदलकर आजीवन कारावास कर दी गई और उन्हें अंडमान की जेल भेज दिया गया।

इस दौरान यह आजाद हिंद फौज से भी जुड़े और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। 25 अप्रैल 1944 को उन्हें लाहौर में दोबारा गिरफ्तार किया गया। बाद में लखनऊ सेंट्रल जेल भेजा गया, जहां से 26 मई 1946 को तीन वर्ष चार महीने की कैद के बाद रिहा हुए।
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मिश्री पांडेय बताते हैं कि परिवार ने उनके सम्मान में आदमकद प्रतिमा भी बनवा ली है, लेकिन स्थापना के लिए वर्षों से जिला प्रशासन के चक्कर लगाने के बावजूद अब तक कोई स्थान नहीं मिल सका। लोगों का कहना है कि जीतन पांडेय को अब तक सम्मान नहीं मिलना इतिहास के साथ न्याय नहीं है।

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66 वर्ष की आयु स्वतंत्रता सेनानी का हुआ था निधन
जीतन पांडेय की मृत्यु 66 वर्ष की उम्र में सन् 1968 में हुई थी, जबकि उनका जन्म सन् 1902 में हुआ था। उनके पुत्र मिश्री पांडेय (75) का जन्म सन् 1950 में हुआ था। मिश्रा पांडेय बताते है मूर्ति लगाने के लिए वह जिलाधिकारी से तीन बार मिल चुके हैं। एक सप्ताह पहले भी उन्होंने जिलाधिकारी से मिलकर मूर्ति लगाने के संबंध में आवेदन दिया है। वर्ष 2002 में मूर्ति लगाने के लिए बनकर तैयार हुई थी।  

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हुरमुजपुर ने आंदोलन में निभाई थी बड़ी भूमिका
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में हुरमुजपुर गांव स्वतंत्रता सेनानियों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा। गांव के सुखराम पांडेय, सखरज पांडेय, शशिनाथ पांडेय, रामराज पांडेय, लालचंद पांडेय, रामपत सिंह, जगन्नाथ सिंह, महावीर गुप्ता, रघुनाथ सिंह, हरिहर सिंह, कपिलमुनि सिंह, सकलदीप सिंह, कालका सिंह, पतिराज सिंह, खेदू सिंह यादव, चिकोतर सिंह यादव, नरोत्तम सिंह यादव और बाबूनंदन यादव सहित दर्जनों लोगों ने आजादी की लड़ाई में सक्रिय योगदान दिया था।

अधिकारी बोले

मेरे पास स्वतंत्रता सेनानी को प्रतिमा लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। अगर कोई आवेदन आता है तो उस पर विचार किया जाएगा। -अतुल कुमार, एसडीएम, जखनिया

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