सूर्य उपासना के महापर्व डाला छठ पर अस्ताचल भगवान सूर्य को प्रथम अर्घ्य मंगलवार की शाम दिया जाएगा। व्रती महिलाएं समूहों में छठ मैया के गीत गाते हुए गंगा घाटों पर पहुंचेंगी। शहर के साथ ही सभी ग्रामीण क्षेत्र के गंगा घाटों, पोखरों एवं तालाबों के किनारे पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं का जमघट लगेगा। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के गंगा घाट असीम आस्था का गवाह बनेेेंगे।
मंगलवार दोपहर एक बजे के बाद से ही व्रती महिलाओं तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों का गंगा घाटों के लिए निकलने का क्रम शुरू हो जाएगा। चार बजते-बजते सभी गंगा घाट श्रद्धालुओं की भीड़ से पट जाएंगे। नजारा कुछ ऐसा होगा कि जिधर नजर जाएंगी, उधर सिर्फ श्रद्धालु ही नजर आएंगे।
घाटों पर पहुंचने के बाद व्रती महिलाएं बनाई गई वेदी को गंगा जल से धोने के बाद उस पर कलश की स्थापना करेंगी। इसके बाद वेदी पर ईंख लगाने के बाद दीप और अगरबत्ती जलाकर पूजन-अर्चन करेंगी। इससे पहले सोमवार की शाम में व्रती महिलाओं ने खीर एवं रोटी अथवा पूड़ी का प्रसाद खाया।