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Ghazipur News: ग्रामीण इलाकों में उज्ज्वला की लौ बुझने पर जलने लगी चूल्हे की आग

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दुल्लहपुर में उज्ज्वला कनेक्शनधारी के घर चूल्हे पर रोटी पकाती युवती-संवाद
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गाजीपुर। जनपद में उज्ज्वला लाभार्थियों की संख्या 3.17 लाख है। गरीबों की सहूलियत के लिए संचालित उज्ज्वला योजना अब रुलाने का काम कर रही है। गैस सिलिंडर को लेकर उज्ज्वला लाभार्थियों के समक्ष बुकिंग व ओटीपी की समस्या आड़े आ रही है। गैस सिलिंडर नहीं मिल पाने के कारण ग्रामीण इलाकों में अब चूल्हे की आग जलने लगी है।
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जिला पूर्ति विभाग का दावा है कि जनपद में गैस सिलिंडर की स्थिति सामान्य है। लेकिन, धरातल पर लोग प्रतिदिन इसके लिए मशक्कत कर रहे हैं। इस समस्या से उज्ज्वला लाभार्थी भी अछूते नहीं है। गैस सिलिंडर मिलने में लेटलतीफी के कारण मजबूरी में उनको पहले जैसी स्थिति में लौटना पड़ रहा है। उज्ज्वला योजना की शुरुआत इसीलिए की गई थी कि गरीब महिलाओं को चूल्हे पर भोजन पकाने से मुक्ति मिल जाए। लेकिन, गैस सिलिंडर की मौजूदा स्थिति के कारण गरीब महिलाएं फिर से चूल्हे की ओर लौटना शुरू कर दी हैं। पेट भरने के लिए प्रतिदिन भोजन पकाना मजबूरी है, ऐसे में गैस सिलिंडर न होने के कारण उनको चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलिंडर की होम डिलीवरी की मियाद 45 दिन निर्धारित की गई है।
धुआं स्वास्थ्य के लिए है खतरनाक

डॉक्टर अरविंद (फिजिशियन) ने बताया कि धुएं से स्वास्थ्य को गंभीर खतरे होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से सांस लेने में तकलीफ, खांसी, आंखों में जलन, अस्थमा का बिगड़ना और फेफड़ों की बीमारियां शामिल हैं। धुएं में मौजूद सूक्ष्म कण और विषाक्त पदार्थ जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
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27 फरवरी के बाद ओटीपी नहीं आने से सिलिंडर नहीं मिल रहा है। इसके कारण काफी दिक्कत हो रही है। अब तो चूल्हे का ही सहारा बचा है। - लीलावती देवी, गोपालपुर। ओटीपी नहीं आने से गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। इससे लकड़ी खरीदकर किसी तरह से भोजन पकाने का कार्य चल रहा है। - माला देवी, चकिया।
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