मौजूदा एनडीए सरकार द्वारा बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 26 से 49 फीसदी बढ़ाने के प्रयास के विरोध में सोमवार को वाराणसी डिवीजन इंश्योरेंस इम्लाइज एसोसिएशन से संबद्ध भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर महुआबाग स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पर धरना देकर प्रदर्शन किया।
उनका कहना था कि भारत सरकार का यह कदम देश की जनता की गाढ़ी कमाई से की गई बचत के लिए खतरा है। इस एफडीआई परिसीमन की वृद्धि से देश की बचत, विदेशी कंपनियों की पूंजी में तब्दील हो जाएगी। इसलिए मजबूर होकर इसका विरोध करना पड़ रहा है।
धरना सभा को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष गुरुजीत सिंह ने कहा कि भारतीय जीवन बीमा निगम के अतिरिक्त जो भी देशी/ विदेशी बीमा कंपनियां देश में विगत 14 वर्षों से कार्य कर रही हैं, उनका ढांचागत विकास कार्यक्रम में योगदान पूरी तरह से नगण्य है।
ऐसे में इंश्योरेंस ला एमेंडमेंट बिल 2008 के खिलाफ इस अभियान मेें आल इंडिया इंश्योरेंस इम्पलाइज एसोसिएशन का हर कोई साथ दे, क्योंकि इस बिल को केंद्र सरकार पास कराना चाहती है, जो देश हित में नहीं है।
जिला मंत्री संतोष कुमार सिंह ने कहा कि आल इंडिया इंश्योरेंस इम्पलाइज एसोसिएशन देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान भारतीय जीवन बीमा निगम के अंतर्गत कार्यरत सबसे बड़ा कर्मचारी संगठन है। इसलिए कर्मी एकजुट होकर केंद्र की मंशा को पूरा नहीं होने देंगे। सरकार को इस बाबत ठोस कदम उठाने होंगे।
वर्ना आंदोलन तेज किया जाएगा। धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से ओमप्रकाश, देवधारी राम, राम विलास शर्मा, विरेंद्र, योगेंद्र, रोहित मिश्रा, संजय विश्वकर्मा, कंचन मिश्रा, सुदर्शन कुमार, रमाशंकर यादव, रामअवतार राम, सुनील रावत आदि मौजूद थे।