स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व विधायक रामसुंदर शास्त्री (95) का शनिवार की रात मुगलसराय में निधन हो गया। वहां वह अपनी बेटी ऊषा किरन के यहां मुगलसराय गए हुए थे। रविवार की सुबह नारीपचदेवरा गांव स्थित गंगा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके अनुज मुन्ना यादव ने दिया। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में यातनाएं सहते हुए भी अंग्रेजों से लोहा लिया था। देश की गुलामी के समय अंग्रेजों के जुल्म को देख रामसुंदर शास्त्री छात्र जीवन में ही स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे। स्वतंत्रता संग्राम में उनका बड़ा योगदान रहा। 1942 में आंकुसपुर स्टेशन पर ट्रेन डकैती में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इस घटना के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें 45 कोड़े मारने के अलावा जेल की सजा सुनाई थी।
करंडा क्षेत्र के नारी पचदेवरा के रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामसुंदर शास्त्री की दो बेटियां ऊषा किरन और सुमित्रा देवी हैं। दोनों की शादी मुगलसराय में हुई है। दोनों बेटियां अध्यापिका हैं। पिछले दस दिनों से रामसुंदर शास्त्री अस्वस्थ चल रहे थे। वह अपनी बेटी ऊषा किरन के यहां गए थे जहां उनका इलाज चल रहा था। शनिवार की रात अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने बेटी के घर अंतिम सांस ली। निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को रविवार की सुबह नारीपचदेवरा लाया गया जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस कर्मियों ने उनके पार्थिव शरीर को गार्ड आफ आनर दिया। इस दौरान क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इस मौके पर सैदपुर के एसडीएम भानुप्रताप सिंह, क्षेत्राधिकारी वेदप्रकाश सिंह, तहसीलदार सैदपुर, एसओ करंडा संजय त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व विधायक रामसुंदर शास्त्री के निधन की खबर सुनते ही राजनीतिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और समाजवादी पार्टी की शोक सभाओं में शास्त्री जी के निधन को एक युग का अंत बताया गया।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नगर में रविवार को हुई शोक सभा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व विधायक रामसुंदर शास्त्री के निधन पर शोक जताया गया। दो मिनट मौन रहकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भाकपा के नेताओं ने कहा कि रामसुंदर शास्त्री अंतिम दम तक शोषितों, पीड़ितों के लिए लड़ाई लड़ते रहे। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। 1967 में जब वह विधायक चुने गए थे तो उस समय का दौर राजनीतिक त्याग, बलिदान और देश भक्ति के प्रति समर्पित था। किसानों, मजदूरों, शोषितों की मुक्ति का रास्ता उन्हीं का अख्तियार किया गया मार्ग है। वह आजीवन भाकपा से जुड़े रहे। उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। करंडा क्षेत्र के नारी पचदेवरा के रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामसुंदर शास्त्री देश आजाद होने के बाद वह भाकपा से 1962 में करंडा के विधायक चुने गए और 1967 तक विधायक रहे। इसके बाद 1967 में वह जमानिया विधानसभा से विधायक चुने गए थे।
शोकसभा और अंत्येष्टि में शामिल होने वालों में भाकपा सचिव अमेरिका यादव, जनार्दन राम, रामायण यादव, आमअवध, रामवदन, रमेश चंद्र पाल, बच्चे लाल, कमालाशंकर सिंह, संजय कुमार, राज नारायण यादव, सपा जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा, अमरनाथ यादव, सुग्रीव, फौजी, डॉ. परमानंद यादव, योगेश सिंह, पिंटू, प्रवीण, अरुण यादव, उदयनाथ सिंह मौजूद रहे। उधर, समाजवादी पार्टी के कचहरी स्थित समता भवन कार्यालय पर सभा में पूर्व विधायक रामसुंदर शास्त्री के निधन पर शोक जताया गया। इस दौरान जिलाध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने कहा कि रामसुंदर शास्त्री महान नेता थे। आधुनिकता की चकाचौंध उनको कभी प्रभावित नहीं कर सकी। वह आजीवन कम्युनिस्ट पार्टी में बने रहे। इस मौके पर रामधारी यादव, अरुण कुमार श्रीवास्तव, रामवचन यादव, लालचंद्र यादव, रामाश्रय यादव, दयाराम यादव, अमरनाथ यादव, सुग्रीव यादव, शिवप्रसाद यादव, सदानंद यादव आदि मौजूद रहे।