शहर के सरजू पांडेय पार्क में विरेंद्र सिंह के साथ प्रदर्शन करते लोग। संवाद
गाजीपुर। लावारिसों लोगों का इलाज, रक्तदान व लावारिस शवों का पोस्टमार्टम कराकर उनके धर्म के मुताबिक शव दाह कराने वाले समाजसेवी कुंवर विरेंद्र सिंह को मेडिकल अस्पताल में किसी भी कार्य के लिए जाने से मेडिकल काॅलेज प्राचार्य द्वारा प्रतिबंधित करने से गहरा आक्रोश है।
इससे गुस्साए सामाजिक कार्यकर्ताओं, सरकारी कर्मचारियों और छात्र- छात्राओं ने सरजू पांडेय पार्क में विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही मेडिकल कॉलेज प्राचार्य पर तुगलकी तानाशाही फरमान का आरोप लगाते नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। जहां डीएम को पत्रक सौंप कार्रवाई की मांग की। इस दौरान कुंवर विरेंद्र सिंह अचेत हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। सामाजिक कार्यकर्ता विवेक कुमार सिंह शम्मी ने कहा कि कुंवर विरेंद्र सिंह निस्वार्थ भावना से लंबे समय से लावारिस शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं। लावारिस लोगों का इलाज करने के साथ उनका देखभाल करते हैं। उनके इस निस्वार्थ सेवा का ही परिणाम रहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के नामचीन प्रतिनिधियों ने सम्मानित किया है। कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा ने कुछ दिन पूर्व अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को व्हाट्सएप पर निर्देश दिया कि कुंवर विरेंद्र सिंह को अस्पताल में किसी भी कार्य के लिए प्रवेश न करने दिया जाए। विरेंद्र सिंह द्वारा किया जा रहा कार्य प्राचार्य को पसंद नहीं आ रहा है और वह अस्पताल में सबके आने-जाने को प्रतिबंधित कर बूचड़ खाना जैसा बनाना चाहते हैं। नगर पालिका परिषद के सभासद सोमेश नीरज राय ने कहा कि प्राचार्य के इस फरमान की जितनी निंदा की जाए कम है। इससे समाज के बुद्धजीवियों के अलावा आमजन में रोष है। पूर्व सभासद संजय सिंह ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराकर तत्काल कार्रवाई की जाए। चेताया कि अगर इस मामले को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया जाता है तो सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और आमजन सड़क पर उतरने को विवश होंगे। इस मौके पर छात्र नेता दीपक उपाध्याय, पूर्व प्रधान संजय राय उर्फ मंटू, उमेश श्रीवास्तव, अनन्या सेवा ट्रस्ट के संस्थापक शशिकांत सिंह उर्फ गुड्डू, कंचन रावत , रीता विश्वकर्मा आदि मौजूद रहीं।