गाजीपुर। वट सावित्री व्रत और शनि अमावस्या का पर्व शनिवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। सौभाग्यवती महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखकर वटवृक्ष की पूजा करेंगी। शेरपुर गांव निवासी ज्योतिषाचार्य मुनींद्र उपाध्याय ने बताया कि सावित्री का अर्थ सत्य के साथ हर परिस्थिति में अपने जीवनसाथी का साथ निभाना है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पतिव्रता स्त्री में इतनी शक्ति होती है कि वह यमराज से भी अपने पति के प्राण वापस ला सकती है। इसी आस्था के साथ महिलाएं वट सावित्री व्रत रखती हैं।
उन्होंने बताया कि इस बार वट सावित्री व्रत पर वृष राशि में चतुर्ग्रही योग बन रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद विशेष माना जा रहा है। वृष राशि में सूर्य, चंद्रमा, बुध और राहु ग्रह के एक साथ विराजमान होने से यह योग बन रहा है। मान्यता है कि इस योग से जीवन में मधुरता आती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है। वट सावित्री व्रत में महिलाएं वटवृक्ष, सत्यवान-सावित्री और यमराज की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। महिलाएं वटवृक्ष में जल अर्पित कर उसके तने पर कच्चा धागा लपेटते हुए 5, 11, 21 या 108 बार परिक्रमा करती हैं। इसके बाद सावित्री कथा सुनकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।