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गंगा की लहरों के आगे सब बेबस, शहर के दो मोहल्लों में पहुंचा पानी

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करंड़ा क्षेत्र के तुलसीपुर गांव बाढ़ के पानी से घिरने के बाद नाव से सुरक्षित स्थान पर जाते लोग। - फोटो : GHAZIPUR
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गंगा की उफनाती नहरों के आगे सभी सिस्टम बेबस नजर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहर में भी गंगा ने कहर ढाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को बाढ़ का पानी शहर के नखास और बंधवा इलाके में पहुंच गया। जिससे कई गलिया में बाढ़ का पानी पहुंच गया। ऐसे में जहां नखास मोहल्ले की गलियों में जलभराव हो गया। वहीं बंधवा में नाव चलाने की नौबत आ गई है। यही हाल करंडा, सैदपुर, रेवतीपुर, सेवराई समेत अन्य क्षेत्रों का है। मंगलवार को गंगा का जलस्तर सुबह 8 बजे 64.360 मीटर रहा। जबकि शाम चार बजे 64.380 मीटर दर्ज किया गया।
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करंडा संवाददाता के अनुसार, बाढ़ के बाद करंडा के सोन्हनपुर, गद्दोगाड़ा, महाबलपुर, तुलसीपुर, शेरपुर, रफीपुर और बड़हरिया के लोग चारो तरफ से पानी से घिर गए हैं। प्रशासन सभी गांवों के लिए नाव की व्यवस्था तो किया है। अभी तक पिछले वर्ष की अपेक्षा कम पानी होने के कारण जगह-जगह चकरोड के कारण नावें नहीं चल पा रही हैं। इससे लोगों को बहुत मुसीबत हो रही है। छोटी नाव कम पानी में चल तो रही हैं लेकिन क्षमता कम होने के कारण कुछ ही लोग बैठ पा रहे हैं।
वहीं, बाढ़ से विस्थापित लोग दीनापुर नहर पर, गोशंदेपुर कालीमंदिर और नटवा बाबा मंदिर के पास कुल 300 परिवार शरण लिए हैं। बाढ़ राहत शिविर इंटर कालेज करंडा, लखनचंदपुर कलां और बसंतपट्टी के कुल 40 परिवार शरण लिए हैं। इस तरह से चारो राहत शिविरों में कुल 419 विस्थापित परिवार शरण लिए हैं। प्रशासन की तरफ से बुधवार को 800 परिवारों को राहत सामग्री बांटने के लिए सूची बनाई गई है।
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दूसरी ओर, दीनापुर के ग्राम प्रधान तुलसी बिंद का कहना है कि कल तो खिचड़ी बनवा दिया था। लेकिन राशन के साथ प्रशासन की तरफ से आर्थिक मदद नहीं मिल पाने के कारण भोजन की व्यवस्था कर पाना मुश्किल है। ऐसे में दीनापुर में शरण लेने वाली कांति देवी, राखी, गुड़िया, प्रेमनरायन बिंद, सुरेंद्र बिंद आदि ने बताया कि आज शाम का खाना खुद ही इंतजाम कर बनाया जा रहा है।
इधर, पशुपालन विभाग पशुओं में बीमारी न फैले इसके लिए जिला उप पशु चिकित्सा अधिकारी शिवकुमार वैश्य, पशु चिकित्सा अधिकारी डा. रजनीश कुमार की टीम ने विस्थापितों के 1090 पशुओं के लिए भूसा और टीकाकरण और इलाज का इंतजाम किये हैं। अब तक करीब 500 पशुओं का गलाघोंटू आदि का टीकाकरण हो चुका है।
औड़िहार संवाददाता के अनुसार, सैदपुर क्षेत्र में गंगा-गोमती की बाढ़ से अभी भी स्थिति भयावह है। दोनों नदियों का जल मंगलवार को दोपहर तक अभी भी खतरे के निशान के 70 मीटर ऊपर है। प्रशासन गंगा के जलस्तर को आज स्थिर मान रहा है किंतु अभी भी दोनों नदियों की बाढ़ के चलते दर्जनों गांव पानी से घिरे हैं। वहीं, 3000 आबादी वाले गांव पटना का भी बाढ़ हाल खराब है। इस गांव में गंगा गोमती का संगम होने के कारण दूर तक टापू जैसी स्थित है। कई किलोमीटर तक जल ही जल दिखाई दे रहा है। इस गांव के पचासों घरों पर गंगा की लहरें हिलोरे मार रही हैं।
कमलेश यादव, सुनील और कौशिल्या ने बताया कि पटना गांव तीन तरह तरफ से पानी से घिर गया है। रात में जहरीले जंतु भी दिखाई दे रहे हैं। जान हथेली पर रख कर सड़क के किनारे वर्ष परशु प्राणी लेकर गुजारा किया जा रहा है। बाढ़ के चलते मेरे गांव के सैकड़ों लोग बेघर होकर किसी तरह जिंदगी बसर कर रहे हैं।
सदर विधायक ने बाढ़ पीड़ितों का जाना हाल
सदर विधानसभा जैकिशन साहू ने मंगलवार को करंडा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया। इस दौरान पीड़ित परिवारों से मिलकर उनका हाल जाना। साथ ही उनके राशन और जरूरतमंद चीजों के लिए सदर एसडीएम तहसीलदार और लेखपालों से वार्तालाप किया। क्षेत्र भ्रमण के दौरान गदोगाडा, मोहबलपुर, जमुआ सेनापुर, तुलसीपुर, चतरपुरा, मलहपुरवा, चौबेपुर, करकटपुर धरम्मरपुर आदि गांव पहुंचे।
40 क्विंटल भूसा वितरित किया
बाढ़ की विभीषिका का दंश झेल रहे पशुपालकों को मंगलवार को नेहरू विद्यापीठ इंटर कॉलेज रेवतीपुर पर बने बाढ़ राहत शिविर में तहसील प्रशासन द्वारा 150 पशुपालकों को 40 क्विंटल भूसा वितरित किया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी डा. शशि भूषण कुमार ने बताया कि पशुपालकों को भूसा के साथ दवा का वितरण किया गया।
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