गाजीपुर। क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान में बुधवार को जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादन गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मुख्य अतिथि जिलाधिकारी के बालाजी ने किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए अधिकारी को निर्देश दिया।
जिलाधिकारी ने कृषकों को सुझाव दिया कि किसान मत्स्य पालन, पशुपालन एवं फसलों के लिए केसीसी बनवाएं और विपरीत मौसम एवं दैवी आपदा की स्थिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत फसल बीमा का लाभ लें। डीएम की ओर से कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों को खरीफ में अधिक उत्पादन कर अपनी फसल की आय को दोगुना करने का सुझाव देने का निर्देश दिया। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डा. डीके सिंह, डा. दिनेश सिंह, डा. सीपी सिंह एवं डा. एसके सिंह की ओर से किसानों को सलाह दी गई कि वह परंपरागत खेती को कम करके सब्जी एवं बागवानी के रकबे को बढ़ाएं एवं पशुपालन करने पर जोर दिया जाए। किसानों को सलाह दी कि वह मिट्टी की जांच कराकर ही उर्वरक का प्रयोग करें। कृषि वैज्ञानिक डीके सिंह ने कहा कि मृदा की उर्वरा के लिए खेतों में सनई एवं ढैंचा का प्रयोग करें ताकि खेत में मिट्टी की उर्वरता बनी रहे। गोष्ठी में उपस्थित किसानों के प्रश्नों का जवाब संबंधित अधिकारियों ने दिया। उप कृषि निदेशक ने खरीफ में कृषि रणनीति के बारे में प्रकाश डाला।
खरीफ में बीज, उर्वरक एवं कृषि यंत्रों यथा सोलर पंप की उपलब्धता के बारे में बताया। कृषि विभाग की योजनाओं से कृषकों को अवगत कराया गया। जनपद प्रतिनिधि इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लि. ने किसानों से अनुरोध किया कि ऋणी एवं गैर ऋणी कृषक अपने अधिसूचित फसल का बीमा अपने बैंक, कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी तथा इफको टोकियों के एजेंट के माध्यम से कराएं। उनके द्वारा फसल बीमा पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। गोष्ठी में अधिशासी अभियंता विद्युत, देवकली पंप नहर, ट्यूबवेल, जिला उद्यान अधिकारी उपस्थित थे। जिला खाद्य विपणन अधिकारी द्वारा आगामी धान क्रय केंद्र की तैयारी के बारे में कृषकों को अवगत कराया गया। गोष्ठी का संचालन तकनीकी सहायक मृत्युंजय कुमार सिंह ने किया।