इसके बाद 29 नवंबर 2005 को भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या मामले में मुख्तार अंसारी के साथ अफजाल अंसारी को आरोपी बनाया गया। अफजाल अंसारी ने इस मामले में कोर्ट में समर्पण कर दिया। लगभग दो वर्ष जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए। दूसरी बार 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के टिकट पर अफजाल अंसारी चुनाव लड़े।
अफजाल अंसारी के घर के बाहर तैनात फोर्स
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गाजीपुर जनपद न्यायालय जाने वाले मार्ग पर सुबह से ही पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी थी। सुबह 9.30 बजे प्रभारी निरीक्षकों ने वहां मोर्चा संभाल लिया था। सुबह 10 बजे से अधिवक्ताओं के आने क्रम शुरू हो गया था। सुबह 10.45 बजे सांसद अफजाल अंसारी एमपी-एमएलए कोर्ट पहुंच गए थे। कुछ देर बाद उन्हें वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम में ले जाया गया। दोपहर तीन बजे न्यायालय ने अफजाल अंसारी को दोषी करार दिया और उन्हें अभिरक्षा में ले लिया गया। इस दौरान चेहरे पर उदासी साफ झलक रही थी।
छावनी में तब्दील हुई कचहरी
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दोपहर 12.45 बजे एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश दुर्गेश ने मुख्तार अंसारी के मामले में फैसला सुनाया। इस दौरान बांदा जेल से मुख्तार अंसारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित थे। दोपहर 1.30 बजे लंच हो गया। इधर, पुलिस बैरिकेडिंग से लेकर कोर्ट रूम तक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद थी। दोपहर तीन बजे कड़ी सुरक्षा के बीच वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम से सांसद अफजाल अंसारी को एमपी-एमएलए कोर्ट लाया गया। इस दौरान न्यायालय कक्ष में मौजूद अधिवक्ताओं को हटा दिया गया।
इसके बाद न्यायाधीश ने अफजाल अंसारी को गिरोह बंद अधिनियम के तहत दोषी करार दिया गया और उन्हें अभिरक्षा में ले लिया गया। सजा का वारंट बनने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया। इधर, न्यायालय परिसर से पुलिस का वाहन निकलते ही समर्थक सांसद की एक झलक पाने के लिए परेशान दिखाई दिए।