नेपाल के पोखरा विमान हादसे के आठ दिन हो चुके हैं। लेकिन अब तक घरवालों को अपने लाल के अंतिम दर्शन नहीं हुए हैं। सोमवार को नेपाल से एंबुलेंसों के शव लेकर गांव चलने की खबर जैसे ही परिजनों को मिली एक बार फिर दर्द फूट पड़ा। पथरा चुकी आंखों में एक बार फिर आंसुओं का सैलाब उफना पड़ा। बसुध पड़ी मां की हालत ऐसी कि देख हर किसी की आंख भर आए।
बीते 15 जुलाई के देर शाम पोखरा विमान हादसे में युवकों की मौत का पता चलते ही बरेसर थाना क्षेत्र के चकजैनब गांव, अलावलपुर अफंगा और धरवां में मातम पसर गया। परिजनों की चीत्कार से आस-पास के गांवों में भी मातमी सन्नाटा पसर गया। घर के चूल्हे भी ठप हो गए। हर कोई इस हादसे से मार्माहत दिखा। आठ दिनों तक परिवार के लोगों को खाना-पीना तो दूर बस एक ही बात कि कब लाल की एक झलक देख लें। सांत्वना देने पहुंच रहे लोगों को देख परिजन बिलख उठ रहे थे।
उनके दर्द को देख लोग बैचेन हो उठ रहे थे। रह-रहकर उठ रही सिसकियां लोगों को परेशान कर दे रही थी। आठ दिन उनके लिए आठ वर्ष के सामान गुजर रहे थे, अब जबकि शव आने की जानकारी हुई तो उनके लिए रात काटनी भी भारी होती दिख रही थी। बराबर परिजन नेपाल शव लेने गए परिजनों के संपर्क में बने हुए थे।
इधर ग्रामीण भी मृतक के दरवाजे पर जुटने लगे थे। हर कोई हादसे से व्यथित दिखाई पड़ रहा था। मालूम हो कि बीते 15 जनवरी को विमान हादसे में चकजैनब के सोनू जायसवाल, अनिल राजभर, धरवां के अभिषेक कुशवाहा और अलावलपुर अफंगा के विशाल शर्मा की मौत हो गई थी। बीते शनिवार को अलावलपुर अफगां के विशाल शर्मा, रविवार को चकजैनब के अनिल राजभर, धरवां के अभिषेक और सोमवार को चकजैनब के सोनू जायसवाल के शव की शिनाख्त हुई थी। इसके बाद परिजन शव लेकर नेपाल के काठमांडू से गाजीपुर के लिए रवाना हुए।